बस कोरोना वैक्सीन अब दूर नही

कोरोना वायरस वैक्‍सीन का इंतजार कर रहे देशवासियों के लिए  खुशखबरी है। ऑक्‍सफर्ड-एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन फेज 3 ट्रायल में 90 फीसदी से ज्‍यादा असरदार रही है। रिसर्चर्स के मुताबिक, अलग-अलग करने पर वैक्‍सीन 90% तक असरदार मिली। वैक्‍सीन ज्‍यादा असरदार तब रही जब पहली डोज हल्‍की और दूसरी सामान्‍य रखी गई। यानी शुरुआती संकेत यह बताते हैं कि वैक्‍सीन वायरस ट्रांसमिशन को कम कर सकती है। वैक्‍सीन सेफ भी पाई गई है और किसी वालंटियर को अस्‍पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी। भारत के लिहाज से यह बेहद अच्‍छी खबर है क्‍योंकि सरकार इसी टीके को सबसे पहले हासिल करने की ओर बढ़ रही है।

 

खास डोज पैटर्न से ज्‍यादा असरदार हो गई वैक्‍सीन

ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन ग्रुप के डायरेक्‍टर और इस ट्रायल के चीफ इनवेस्टिगेटर प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड के मुताबिक, ‘यह नतीजे दिखाते हैं कि एक असरदार वैक्‍सीन कई जिंदगियां बचा सकती है।’ उन्‍होंने बताया कि डोज के चार पैटर्न्‍स में से एक में वैक्‍सीन 90% तक असरदार रही और अगर हम वही पैटर्न अपनाएं तो कई लोगों को वैक्‍सीन दी जा सकती है। ट्रायल में पता चला कि अगर वैक्‍सीन की पहली डोज आधी दी जाए और दूसरी डोज पूरी तो यह 90% तक असर करती है। इस वैक्‍सीन के अंतरिम एनालिसिस के लिए यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में 24,000 से ज्‍यादा वॉलंटियर्स के डेटाबेस का यूज किया गया। यह वैक्‍सीन आसानी से वर्तमान हेल्‍थकेयर सिस्‍टम के तहत बांटी जा सकती है क्‍योंकि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्‍टोर करना होगा। एक बयान में ऑक्‍सफर्ड ने कहा कि 10 से ज्‍यादा देशों में वैक्‍सीन का उत्‍पादन जारी है

अब इमर्जेंसी अप्रूवल का करना होगा इंतजार

ऑक्‍सफर्ड और एस्‍ट्राजेनेका मिलकर अब वैक्‍सीन का यह अंतरिम एनालिसिस यूके में ड्रग रेगुलेटर के सामने रखेंगे। अगर वैक्‍सीन को इमर्जेंसी अप्रूवल मिलता है तो दिसंबर से यह वैक्‍सीन उपलब्‍ध हो सकती है। यूके में इमर्जेंसी अप्रूवल पर भारतीय कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की भी नजर होगी। उसने एस्‍ट्राजेनेका से वैक्‍सीन की 100 करोड़ डोज की डील की है। अगर यूके में इमर्जेंसी अप्रूवल मिलता है तो कंपनी भारत में भी वैक्‍सीन के उसी डेटा के आधार पर इमर्जेंसी अप्रूवल के लिए अप्‍लाई कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत में ‘कोविशील्‍ड’ नाम से यह टीका जनवरी तक उपलब्‍ध हो सकता है। ऑक्‍सफर्ड-एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन की ग्‍लोबल रेस के फ्रंटरनर्स में शामिल है। फाइजर और मॉडर्ना के टीके 90% से ज्‍यादा असरदार रहे हैं लेकिन उनकी कीमतें इतनी हैं कि वह मध्‍य और निम्‍न आय वाले देशों के लिए मुफीद नहीं। रईस देशों से इतर दुनिया के लिए ऑक्‍सफर्ड-एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन ही उम्‍मीदें जगा रही है। लंदन की एक रिसर्च फर्म के अनुसार, मध्‍य और निम्‍न आय वाले देशों में 40% खपत इसी टीके की होगी। यह वैक्‍सीन फाइजर के मुकाबले बेहद सस्‍ती है और कई देशों में इसका प्रॉडक्‍शन होगा। इसके लिए अल्‍ट्रा-कोल्‍ड टेम्‍प्रेचर की भी जरूरत नहीं है।

यानी कोरोना बस कुछ दिन की बात है क्योकि वैक्सीन अब दूर नही है लेकिन इन सब के बीच एक बात जरूर याद रखे की फिलाहल अभी इस वक्त कोरोना से बचने के लिये बनाई गई गाइडलाइन को लेकर ही चले जिससे कोरोना जाते जाते आपको नुकसान नही पहुंचा सके।