RCEP में भारत की ना का असर, जापान के कहा- भारत नहीं तो RCEP में हम भी नहीं

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से देश की बागडोर संभाली है, दुनियाभर में भारत की साख मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का रुतबा लगातार बढ़ रहा है। मोदी ने अपनी विदेश नीति से दुनिया के कई देशों के साथ भारत की दोस्ती मजबूत बनाई है। जापान ने एक बार फिर से भारत से उसकी गहरी दोस्ती के संकेत दिए हैं। अगले महीने जापान के प्रधानमंत्री शिंजों आबे भारत की यात्रा पर आने से पहले जापान ने RCEP को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। जापान ने कहा है कि अगर भारत दुनिया के सबसे बड़े प्रस्तावित फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट का सदस्य नहीं बनता है, तो जापान भी इस डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।

RCEP Summit

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुए क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते पर भारत के शामिल ना होने बाद जापान ने भी RCEP समझौते पर चीन को झटका दिया है। प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दिल्ली यात्रा सहित कई कूटनीतिक समझौते से पहले जापान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारत आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होता है तो जापान भी इससे परहेज करेगा। चीन की अगुवाई वाले RCEP समझौते पर जापान के भी हस्ताक्षर करने से इनकार करने से चीन की परेशानी और बढ़ने वाली है।

अब जापान के शीर्ष प्रतिनिधियों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागरदारी समझौते में भारत शामिल नही होता है तो जापान भी इससे पीछे हट सकता है। इस माह के मध्य तक जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी भारत के दौरे पर आने वाले है और हाल ही भारत और जापान के शीर्ष मंत्रियो के बीच टू प्लस टू स्तर की वार्ता भी हुई है।

जापान के डिप्टी ट्रेड मिनिस्टर हिदेकि माकीहारा ने एक इंटरव्यू में कहा, “अभी हम डील पर साइन करने की सोच भी नहीं रहे हैं। यह जापान के लिए सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर अच्छा रहेगा अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र इस डील पर साइन कर लेता है”। बता दें कि जापान बिल्कुल नहीं चाहता कि RCEP पर भविष्य में चीन का दबदबा बन जाये और RCEP के सभी देशों को चीन के एकाधिकार से जूझना पड़े। ऐसे में भारत के बाहर हो जाने से बाकी सभी देश भी RCEP को लेकर चौकन्ना हो गए हैं और जापान ने आज इस पर अपना स्पष्टीकरण भी दे दिया है।

PM Modi IN RCEP

बैंकॉक में आयोजित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीरदारी समझौते से अलग होते हुए भारत ने इस बात का तर्क दिया था कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से भारतीय नागरिकों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है और घरेलु उद्योगो पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

लेकिन अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में उलझा चीन सुस्त आर्थिक वृद्धि दर से निपटने के लिए आरसीईपी को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है। इस समझौते से चीन के लिए एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के दरवाजे खुल जाएंगे।

RCEP में शामिल देश

आरसीईपी वार्ता में हिस्सा लेने वाले अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, न्यू जीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड तथा वियतनाम हैं।

क्या है आरसीईपी समझौता?

आरसीईपी (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी) एक व्यापार समझौता है। यह सदस्य देशों को एक-दूसरे के साथ व्यापार करने की सहूलियत प्रदान करता है। समझौते के अनुसार सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर लगने वाला टैक्स (कर) या तो बिल्कुल नहीं भरना पड़ता है या बहुत ही कम भरना पड़ता है। आरसीईपी के सदस्य देशों की जीडीपी पूरी दुनिया की जीडीपी की एक-तिहाई है और दुनिया की आधी आबादी इसमें शामिल है।

 


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