जम्मू एंड कश्मीर बैंक मुद्दा – मोदी सरकार की कश्मीर नीति का एक संकेत

J & K BANK

जम्मू एंड कश्मीर बैंक के अध्यक्ष परवेज अहमद को बैंक में हुई अवैध और अनियमित रूप से किये गए नियुक्तियों की शिकायत के बाद हटा दिया गया था| इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बैंक के श्रीनगर मुख्यालय पर छापेमारी की|

फर्जी नियुक्तियाँ

ACB के एक अधिकारी के अनुसार, ब्यूरो पिछले कुछ सालों में की गयी नियुक्तियों की जाँच कर रहा था जिसमे की भीषण अनियमितताएं पायी गयी| उदाहरण के तौर पर बारहवीं पास शम्शुद्दीन अंद्राबी (जो पूर्व पीडीपी मंत्री फ़ारूक अंद्राबी के भाई हैं) को सीधे मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया जो फिलहाल भद्रवाह ब्रांच में कार्यरत थे| जाँच के दौरान ACB ने पाया की ऐसे कितने ही मलाईदार पदों पर परवेज अहमद ने अपने करीबी रिश्तेदारों को नियुक्त किया था| इसके अलावा करीब 1200 नयी नियुक्तियों में सिर्फ पीडीपी के कार्यकर्ता या उनके रिश्तेदारों की ही नियुक्ति हुई|

बैंक की कारर्वाई में अनियमितताएं

नियुक्तियों के अलावा भी बैंक की कारर्वाई में ढेर सारी अन्य अनियमितताएं सामने आई है| बैंक के शाखाओं ने नवीनीकरण के लिए जरुरत से ज्यादा राशि का भुगतान किया गया, बैंक डिफाल्टर खाताओं पर ओवरड्राफ्ट की सुबिधा दी गयी, CSR के नाम पर गोल्फ कोर्स का सौन्दर्यीकरण किया गया, लोन की अर्हता पूरी न होने के बाद भी (करीबी) ग्राहकों को लोन दिया गया|

जम्मू एंड कश्मीर मामले पर सरकार और वित्त विभाग के कड़े रुख ने ये साफ़ कर दिया है कि सरकार अब किसी भी हालत की किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है| पिछले तीन दसकों से घाटी में चल रहे सामाजिक और राजनितिक उथल-पुथल तथा अस्थिरता को रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है|