इसरो ने Cartosat-3 सैटेलाइट किया लॉन्च, अंतरिक्ष से दुश्मन पर रखेगा पैनी नजर

ISRO launches Cartosat-3 satellite

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से कार्टोसैट-3 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसके साथ ही इसरो ने 13 अमेरिकी नैनो सैटेलाइट का भी सफल लॉन्च किया है। इसे PSLV-C47 द्वारा प्रक्षेपित किया गया है। पीएसएलवी-सी47 की यह 49वीं उड़ान है, जो कार्टोसैट-3 के साथ अमेरिका के 13 छोटे उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा।

इसरो प्रमुख के सिवन ने इस सफल लॉन्च पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कार्टोसैट-3 उच्चतम रिज़ॉल्यूशन वाला उपग्रह है। इसरो ने कुल मिलाकर आज एक साथ 14 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है कार्टोसैट-3 सैटेलाइट के जरिए भारत, पाकिस्तान सहित अपने दुश्मन देशों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा।

इसरो के कार्टोसैट-3 के अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है। इसरो की ओर से इसकी आधिकारिक जानकारी उनके ट्विटर हैंडिल के माध्यम से दी गई है। इसरो ने आज कार्टोसैट-3 समेत 13 नैनो सैटेलाइट को एकसाथ लॉन्च किया है।

इससे पहले देश के इमेजिंग सेटेलाइट कार्टोसैट-3 के लांच से पहले इसरो प्रमुख के. सिवन मंगलवार को आंध्र प्रदेश में तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर के दरबार पहुंचे और विधिपूर्वक पूजा अर्चना की।

Cartosat-3

कार्टोसैट-3 पांच साल तक काम करेगा। जुलाई में भारत के मून मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के बाद इसरो ने यह पहला सैटेलाइट लॉन्च किया है। कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर एक फीट से भी कम की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है। इससे देश के दुश्मनों के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सकती है। कार्टोसैट-3 तीसरी पीढ़ी का बेहद चुस्त और उन्नत उपग्रह है जिसमें हाई रिजोल्यूशन तस्वीर लेने की क्षमता है। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है।अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है। इसका भार 1,625 किलोग्राम है और यह बड़े पैमाने पर शहरी नियोजन, ग्रामीण संसाधन और बुनियादी ढांचे के विकास, तटीय भूमि के उपयोग तथा भूमि कवर के लिए उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करेगा।

बता दें कि PSLV XL 320 टन भारी और 44 मीटर लंबा रॉकेट है। ये ठोस और तरल ईंधन के जरिए संचालित किया जाता है। उड़ान के शुरुआती चरण में इसमें अतिरिक्त जोर देने के लिए इसमें छह स्ट्रैप ऑन बूस्टर मोटर्स हैं। इससे पहले इसी साल 22 मई को उसरो ने कार्टोसैट -2 एक पृथ्वी इमेजिंग सेटेलाइट भेजा था। इसमें मल्टी स्पेक्ट्रन कैमरे लगाए गए थे। इसे आई इन द स्काई के नाम से भी जाना जाता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी। सभी प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम इस उपग्रह के जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की उम्दा तस्वीरें ली जा सकती हैं। इस सीरीज के उपग्रहों को सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने के लिए 26/11 मुंबई हमलों के बाद विकसित किया गया था।

कार्टोसैट-3 का उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी और उसके आतंकी कैंपों पर नजर रखने के लिए होगी। अगर दुश्मन या आतंकियों ने कोई हिमाकत की तो इस आंख की मदद से हम उनकी हर नापाक हरकत को विफल कर देंगे।