इसरो ने रचा इतिहास – अंतिम लक्ष्य न मिलने पर भी देश और दुनिया ने माना इसरो का लोहा

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,
संधर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही|

शिवमंगल सिंह सुमन की कविता, “वरदान माँगूगा नहीं” की ये पंक्तियाँ जिसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी अक्सर सुनाया करते थे, इसरो की मौजूदा कामयाबी के लिए एकदम सटीक है|

इसरो ने कल रचा इतिहास

ISRO created history

कल की रात भारत के लिए, भारतवासियों के लिए ऐतिहासिक दिन था| भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संस्थान द्वारा निर्मित चंद्रयान 2, चाँद के दक्षिण ध्रुव पर कदम रखने वाला था| देश की 130 करोड़ जनता की शुभकामनाओं के साथ इसरो के वैज्ञानिक, देश के प्रधानमंत्री, और सम्पूर्ण विश्व उस पल का साक्षात्कार कर रहा था, जब इसरो का चंद्रयान 2 चन्द्रमा की सतह पर कदम रखने से सिर्फ 2.2 किलोमीटर दूर था| कुछ अनजान कारणों से अंतिम समय में चंद्रयान के लैंडर से संपर्क टूट गया और इसरो पहले ही प्रयास में चाँद पर कदम रखने से सिर्फ 2.2 किलोमीटर दूर रह गया|

दक्षिण ध्रुव पर जाने का इसरो का हौसला अद्वितीय – मशहूर अमेरिकी एस्ट्रोनॉट, जेरी लिनेगर

Jerry M. Linenger

लेकिन अपने अंतिम लक्ष्य से एक कदम दूर रहने के बाद भी देश और दुनिया ने माना की ये इसरो की एक ऐतिहासिक कामयाबी है| जब लैंडर से अंतिम समय में संपर्क टूट गया और पूरी दुनिया अपनी साँसे रोक कर आगे क्या होगा का ये जानने का इन्तजार कर रही थी; उस समय नेशनल जियोग्राफिक चैनल द्वारा प्रसारित लाइव प्रोग्राम में मशहूर अमेरिकी एस्ट्रोनॉट, जेरी लिनेगर ने कहा कि, “आगे क्या होता है उस से इसरो की सफलता और असफलता को नहीं जोड़ा जा सकता| इसरो ने चाँद के दक्षिण ध्रुव पर जाने की सोच कर ही इतिहास बनाया था| अगर इसरो को आसान काम करना होता तो वो चाँद के उस हिस्से में भी जा सकता था, जहाँ बाकी के देश जा चुके हैं और जहाँ के बारे में विस्तृत जानकारी दुनिया को है|”

जेरी लिनेगर ने अपने अनुभव और पूर्व के स्पेस कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि, “अन्तरिक्ष में कुछ भी सफलता और असफलता नहीं होती, किसी को कुछ नहीं पता की वहां क्या है? वहां किस तरह की स्थितियाँ मिल सकती है| कोई भी स्पेस एजेंसी सिर्फ पूर्व से उपलब्ध आंकड़ों और अपने रिसर्च के अनुसार ही अपनी योजना बनाती है, और ये सब अनुमान पर आधारित होता है| इसलिए असफल मिशन में भी अंतिम समय में जो आंकड़े और सुचना प्राप्त होती है, वो अगले सफल मिशन का आधार बनती है|”

लिनेगर ने इसरो के वैज्ञानिकों की बहुत सराहना की और कहा कि, जिस प्रकार से कम लागत में अद्भुत उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता और कौशल इसरो में है, वो विश्व के किसी और स्पेस एजेंसी में नहीं|

प्रधानमंत्री मोदी ने बढाया इसरो वैज्ञानिकों का हौसला

The country and the world accepted ISRO's iron powerइसरो कमांड सेंटर में खुद उपस्थित रहकर प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया| अंतिम समय में विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने के बाद के अपने संक्षिप्त संबोधन में मोदी ने इसरो वैज्ञानिकों का साभार व्यक्त किया और कहा की उन्हें इस से निराश होने की जरुरत नहीं है| उन्होंने खास कर कहा कि, ”इसरो अपने आप में कामयाबियों की इनसाइक्लोपीडिया है। इसलिए नाकामयाबियों से घबराने की जरूरत नहीं है।“

विक्रम साराभाई की अगुवाई में शुरू हुए इस संस्थान ने न जाने कितनी निराशाएँ झेली, लेकिन इस संस्थान ने टेक्नोलॉजी, संसाधन, उपकरण, और बजट जैसी अनेकों समस्याओं को अपने दम पर पार कर अपने आप को विश्व की अग्रिम पंक्ति के अन्तरिक्ष संस्थानों में खड़ा कर दिया|