क्या पीएम मोदी, गांधी परिवार से हुए प्रधानमंत्रियों का सम्मान नहीं करते?

14 अप्रैल को दिल्ली ने एक नई कहानी लिखी है जिसमें देश के सारे प्रधानमंत्रियों का देश के लिए योगदान को सम्माहित किया गया है। बात हो रही है ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ की जिसका उद्घाटन पीएम मोदी ने किया है। अब पीएम मोदी किसी संग्रहालय का उद्घाटन करें और वह विवादों से दूर रहे ऐसा विपक्षी दल होने नहीं देते। ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ पर विवाद का आलम यह था कि एक परिवार से जुड़े प्रधानमंत्री के परिवार ने ना सिर्फ इसके निर्माण में अपने सहयोग से भी दूरी बनाई बल्कि उद्घाटन कार्यक्रम से भी दूरी बना ली। आरोप वही था कि मोदी सरकार नेहरू की विरासत से या तो छेड़ छाड़ कर रही है या नाम बदल रही है। भारत सरकार की गलती सिर्फ इतनी थी कि म्यूजियम के नाम पर जो सिर्फ एक परिवार का कब्जा था (नेहरू संग्रहालय) उसे देश के अब तक के हुए सारे प्रधानमंत्रियों के नाम समर्पित कर दिया गया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में देश के पहले प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते नजर आते हैं। उनकी कश्मीर पॉलिसी सहित कई मुद्दों पर आलोचना भी करते भी दिखते हैं। सोशल मीडिया पं नेहरू से जुड़े मीम और दूसरे जानकारियों से पटा पड़ा होता है। इंदिरा गांधी के आपातकाल को पीएम मोदी नहीं भूलते हैं। इसी तरह से राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में हुए बोफोर्स सौदा में भ्रष्टाचार पर पीएम मोदी आक्रामक रहते हैं।

 

क्या इन बातों से यह मान लिया जाए कि पीएम मोदी गांधी परिवार से हुए तीन प्रधानमंत्रियों से नफरत करते हैं या देश के लिए उनके योगदान को नहीं मानते हैं? क्या पूर्वर्ती  प्रधानमंत्रियों के नीतियों की आलोचना करना निजी दुश्मनी की तरह है? क्या पहले की सरकारों में हुए भ्रष्टाचार पर बोलना पूर्व प्रधानमंत्रियों का अपमान है? इन सवालों के जवाब तलाशते तलाशते वो कुछ मिला जोएक  बनाए गए Narrative से बिल्कुल उल्टा है। 

 

पीएम मोदी सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को देते हैं सम्मान, चाहे वो खास परिवार से हों या गरीब-किसान परिवार से

 पीएम मोदी ने कल ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ के उद्घाटन में देश के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को याद किया। पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा “देश आज जिस ऊंचाई पर है, वहां तक उसे पहुंचाने में स्वतंत्र भारत के बाद बनी प्रत्येक सरकार का योगदान है। मैंने लाल किले से भी ये बात कई बार दोहराई है।“

 

 

लाल किले से अपने भाषण में भी पीएम मोदी देश के विकास में पूर्वर्ती परधानमंत्रियों के योगदान को सराहा है। 15 अगस्त 2014 को लाल किला के प्राचीर से अपने ऐतिहासिक भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि:

“आज़ादी के बाद देश आज जहाँ पहुँचा है, उसमें इस देश के सभी प्रधान मंत्रियों कायोगदान है, इस देश की सभी सरकारों का योगदान है, इस देश के सभी राज्यों की सरकारों का भी योगदानहै। मैं वर्तमान भारत को उस ऊँचाई पर ले जाने का प्रयास करने वाली सभी पूर्व सरकारों को, सभी पूर्वप्रधान मंत्रियों को, उनके सभी कामों को, जिनके कारण राष्ट्र का गौरव बढ़ा है, उन सबके प्रति इस पलआदर का भाव व्यक्त करना चाहता हूँ, मैं आभार की अभिव्यक्ति करना चाहता हूँ”

https://www.narendramodi.in/hi/text-of-pms-speech-at-red-fort-6464

संसद भवन के पटल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पूरे भारत को अपने देश से जोड़ता है। देश के लोकतंत्र के मंदिर में भी पीएम मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास को नमन करते हुए इस विकास गाथा के लिए पूर्व के सभी प्रधानमंत्रियों का धन्यवाद ज्ञापन किया है।

बांग्लादेश के युद्ध में इंदिरा गांधी की भूमिका को भी पीएम मोदी ने ढाका में 26 मार्च 2021 को याद करते हुए कहा कि ‘हम उन लोगों को नहीं भुला सकते जिन्होंने बांग्लादेश की आजादी के लिए अपनी जान दे दी। बंगबंधु मुजीबुर्रहमान एक आशा की किरण की तरह थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी देश बांग्लादेश पर शासन नहीं कर सकता। 1971 के युद्ध में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।”

‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ उसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है जहां भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विकास गाथा को एक जगह पर देश के सामने लाया गया है।

 

काँग्रेस सरकारें सिर्फ देती रही है गांधी परिवार के प्रधानमंत्रियों को तवज्जो

काँग्रेस सरकार के दौर में भारत के विकास के इतिहास को ‘एक परिवार’ तक सीमित करने की कोशिश की गई है। नेहरू, इंदिरा और राजीव के नाम से देश में अनगिनत पुरस्कार, एयरपोर्ट, हॉस्पिटल, स्कूल-कॉलेज, सड़क, पुल की भरमार करने वाली काँग्रेस सरकारों ने गैर कॉंग्रेसी/गांधी परिवार वाले दूसरे प्रधानमंत्रियों को भूला दिया। करीब 30 एकड़ में बने नेहरू म्यूजियम, 52.6 एकड़ में बने शांति वन (नेहरू की समाधि), 45 एकड़ में बने शक्ति स्थल (इंदिरा गांधी की समाधि), 7.75 एकड़ में फैले इंडिया गांधी मेमोरियल और 17 एकड़ में बने वीर भूमि (राजीव गांधी की समाधि) यह गवाही देता है कि कैसे कॉंग्रेस सरकारों ने सिर्फ एक परिवार के प्रधानमंत्रियों का ख्याल रखा।

 

काँग्रेस करती रही है गैर कॉंग्रेसी और गैर गांधी परिवार के प्रधानमंत्रियों का अपमान  

इतिहास की किताबें भरी पड़ी हैं कि काँग्रेस ने कैसे देहांत के बाद भी पीवी नरसिंह राव का अपमान किया था और काँग्रेस मुख्यालय में उनके पार्थिव शरीर को रखने तक का अनुमति नहीं दिया था। मनमोहन सिंह के Ordinance को फाड़ने वाला राहुल गांधी का वह प्रेस कोन्फ़्रेंके को कैसे भूला जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल किये गए शब्दों की लिस्ट इतनी लंबी है कि गालियों का शब्दकोश बन जाए। स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य होना काँग्रेस की सरकारों के उस नजरिया को दिखाता है कि हम तो सिर्फ एक परिवार से बंधे रहेंगे। मोरार जी देसाई के प्रति काँग्रेस का रवैया आज भी राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 

 

प्रधान मंत्री संग्रहालय के उद्घाटन में गैर-काँग्रेस/गांधी परिवार प्रधानमंत्रियों का छलका दर्द

प्रधानमंत्री संग्रहालय के उद्घाटन में हैदराबाद से आए पीवी नरसिम्हा के पोते एन वी सुभाष ने कहा कि आज के कार्यक्रम में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने नहीं आकर यह साबित कर दिया कि आजादी के 75 वर्षो बाद भी गांधी परिवार देश और देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में नहीं बल्कि सिर्फ अपने परिवार के बारे में ही सोच रही है।  सुभाष ने कहा कि उनके दादा (पीवी नरसिम्हा राव) ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस को समर्पित कर दिया, वो कांग्रेस को अपनी मां मानते थे। लेकिन कांग्रेस ने, खासतौर से गांधी परिवार ने उन्हें कभी वह सम्मान नहीं दिया, जिस सम्मान के वो हकदार थे। एन वी सुभाष ने कहा कि विरोधी दल के प्रधानमंत्री होने के बावजूद नरेंद्र मोदी ने विचारधारा के आरोप पर कोई भेदभाव नहीं करते हुए उनके दादा के साथ-साथ देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। 

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सुनिल शास्त्री ने कहा, ‘‘हमने उन्हें संग्रहालय के लिए पुस्तकें और तस्वीरें दीं। मेरे पिता को दहेज के रूप में मिला एक चरखा भी संग्रहालय को दिया। जब मेरे पिता ने दहेज लेने से मना कर दिया था तब उन्हें यह चरखा दिया गया था। ये बहुत ही निजी चीजें हैं और हमने भारी मन से उन्हें दिया है। संग्रह में उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया एक बैडमिंटन रैकेट और एक गुलदस्ता भी शामिल है, जो उन्हें ताशकंद की उनकी अंतिम यात्रा के दौरान उपहार में मिला था। ’’सुनील ने कहा कि उन्होंने संग्रहालय में शामिल किये जाने वाली अपने पिता लाल बहादुर शास्त्री की वस्तुओं के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए अधिकारियों के साथ कई बैठकें की थी।

चौधरी चरण सिंह की पोती संध्या अग्रवाल भी उस वक्त भावुक नजर आईं , जब उन्होंने अपने दादा से जुड़ी संग्रहालय की वस्तुओं को देखा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभिभूत हूं। यह उनकी विरासत को संरक्षित रखने की एक बड़ी पहल है। यह विचारपूर्ण और बखूबी निर्मित है। भावी पीढ़ी के लिए भी उन लोगों को जानना जरूरी है जिन्होंने इस देश का निर्माण किया। मैं अपने बच्चों को यहां लाने की सोच रही हूं।’’परिवार ने पूर्व प्रधानमंत्री की तस्वीरें, पत्र, पुस्तकें और डायरी संग्रहालय को दी। देवगौड़ा और मोरारजी देसाई के रिश्तेदार तथा वाजपेयी की दत्तक पुत्री भी कार्यक्रम में शरीक हुईं। 

 

सवाल अब उनसे होना चाहिए जो पीएम मोदी पर आरोप लगाते हैं कि वो गांधी परिवार से हुए प्रधानमंत्रियों को सम्मान नहीं करते, कि आखिर गांधी परिवार दूसरे पूर्व प्रधानमंत्रियों को सम्मान क्यों नहीं देती? आखिर क्यों इस ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ के निर्माण में गांधी परिवार ने रुचि नहीं दिखाई? आखिर क्यों गांधी परिवार का कोई सदस्य उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने नहीं आया? 

पूरे संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सभी प्रदर्शनीय वस्तुएं पुरानी सामग्री हैं क्योंकि उनके परिवारों ने संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए कोई नई वस्तु नहीं दी है।