जहालत की एक थूक से भय में हूँ

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जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है तब से ही घर पर लॉकडाउन हूँ। घर से बाहर निकलना तो दूर, छत पर या चौखट पर खड़े होने पर भी  भय लगता है कि कहीं बदमाश कोरोना वायरस दबोच न ले! लेकिन इस दौरान कुछ लोगों से भी बहुत डरा हुआ हूँ, जो बिना डरे हर जगह बस थूक रहे हैं, फिर वो मीडिया हो या फिर सड़क या फिर दूसरे स्थान, शायद मैं ही नहीं इनसे हर वो लोग डर रहे होंगे, जो मानवता पर विश्वास रखते हैं।

मीडिया हो या सोशल मीडिया बस थू थू करने में माहिर 

देश में सिर्फ सड़क पर थूकने वालों से सावधान रहना है, ऐसा ही नही है बल्कि उन लोगों से भी सावधान रहना है जो हर दिन नकारात्मक बातें  करके मीडिया हो या सोशल मीडिया पर थूक कर निराशा के वायरस फैला रहे हैं, जो लोग झूठी खबरों को दिखाकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखा गया, जब पीएम मोदी ने देश में एकता के बल को दिखाने और कोरोना वायरस के अंधकार को दूर करने के लिये एक दीप जलाने की अपील की| बस क्या था, मौका मिल गया थूक कर वायरस फैलाने वालों को, फिर क्या लग गये सोशल मीडिया पर और मीडिया पर बिना मतलब थूकने कि पीएम ने ये गलत किया, पीएम को ये करना चाहिये, लगता तो यही है जैसे सारा ज्ञान इनके पास ही है।

ऐसे लोगों से जरूर बचकर रहना चाहिये क्योंकि इनका वायरस ही देश की एकता को खतरा पहुंचाता है। ये वही लोग हैं जो कल तक टीवी पर बैठकर पहले दीपक पर नई नई बातें बता रहे थे तो बाद में मलेरिया के लिये प्रयोग होने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के ज्ञाता हो गये। ऐसे लोगों  का ज्ञान वायरस से कम नही जो लोगों के सोचने समझने की शक्ति को कम करता है। तो अब ऐसे लोगो से सावधान रहेंगे न? 

सड़क पर थू -थू वीरों का शौर्य 

कुछ जमात ऐसी है जो थूथू करने और करवाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। जहां कुछ लोग बीमारी वाले वायरस को मारने में लगे हैं, वहीं वायरस वाहक उन्हें ही दौड़ा रहे हैं। अव्वल तो पत्थर से मारते हैं। अगर दूर से निशाना चूकता है, तो नजदीक से थूक देते हैं। इस महामारी में दुनिया भर में ऐसी रचनात्मक मिसाल ढूंढने से नहीं मिलती। जान बचाने वाले भले दुविधा में हों, पर थूकने वाले नहीं। जान बचाने वालों पर वे थूक छिड़क रहे हैं। थूकने वालों को लगता है कि उन्हें जन्नत जाने से रोकने की साजिश हो रही है। थूकना अब क्रिया नहीं कर्म बन गया है। आज जब हर जगह आदमीआदमी से दूर भाग रहा है,जहालत वाले जमात जोड़ रहे हैं। उनके लिए यह नेक काम है। वे वायरस को दुश्मनों की चाल बता रहे हैं। ऐसी जहालत के समर्थन में पढ़ेलिखे भी शामिल हैं। 

 इतना ही नहीं विश्व के दो बड़े देश भी आपस में कोरोना को लेकर थूकने में लगे हैं| अमेरिका कोरोना को लेकर चीन पर थू थू कर रहा है तो चीन अमेरिका पर निशाना साध कर थू थू कर रहा है। ऐसे ये तो मानना पड़ेगा कि जब थूकने पर हर तरफ रोक लगी है, तब इतना थू थू हर वक्त हो रहा है। ऐसे में जब रोक नहीं थी तो कितना थू थू होता था वो आज समझ में आया चलते चलते बस यही सब से अपील करता हूँ कि थू थू जरूर करे लेकिन बुराई पर, मानवता धर्म पर हमला करने वालों पर, और हां देश तोड़ने वालों पर| लेकिन ऐसा थू थू न करे जिससे देश की छवि खराब हो। 


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