दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री, तेल आयात पर सुषमा स्वराज से वार्ता

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ईरानी विदेश मंत्री, जवाद जरीफ दो दिवसीय दौरे के लिए आज मंगलवार की सुबह भारत पहुंचे| जहाँ एक तरफ चीन के बाद, भारत इरान के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है| वहीँ दूसरी तरफ इरान की अर्थव्यवस्था तेल के निर्यात पर निर्भर है|

उल्लेखनीय है कि, मध्य पूर्व में हो रही उठा-पटक और उसमे ईरान के अमेरिका विरोधी रुख के कारण, अमेरिका ने ईरान से तेल आयात पर प्रतिबन्ध लगाया था| हालाँकि इस प्रतिबन्ध से ८ प्रमुख आयातक देशों को, पिछले साल नवम्बर में ६ महीने की छुट दी गयी थी| इस प्रतिबन्ध की अवधि हाल ही में समाप्त हो चुकी है|

इसलिए, जवाद जरीफ का ये दौरा भारत और ईरान के बीच तेल आयात के संबंधों के भविष्य की रूप रेखा तय करेगा, ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं| इसी सिलसिले में जवाद जरीफ और सुषमा स्वराज के बीच वार्ता होगी| विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, “इस वार्ता में ईरान से कच्चे तेल आयात के मुद्दे का समुचित और दूरदर्शी समाधान निकालने की कवायद होगी| और ये बात स्पष्ट है की, भारत अपने देश की उर्जा और वाणिज्यिक मुद्दों पर किसी भी हालत में समझौता नहीं करेगा|”

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था कच्चे तेल पर बहुत हद तक निर्भर होती है| विकास का पहिया बिना उर्जा के नहीं घूम सकता और भारत अपने पेट्रोलियम सम्बंधित जरूरतों का ८०% से भी ज्यादा आयात करता है| पिछले वित् वर्ष २०१७-२०१८ में ईरान से कच्चे तेल का कुल आयात २.२६ करोड़ टन था| हालाँकि प्रतिबन्ध के बाद वैकल्पिक व्यवस्थाओं और किसी भी प्रकार ही अनहोनी से बचने के लिए ईरान पर निर्भरता कम करने की कोशिश करते हुए आयात को घटाकर २०१८-२०१९ में १.५० करोड़ टन कर दिया गया|

रवीश कुमार (विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता) ने बताया की भारत इस चुनौती से निपटने को पूरी तरह तैयार है| हमारे पर वैकल्पिक उपायों की कमी नहीं है| दोनों विदेश मन्त्रियों की बैठक में चाबहार बंदरगाह में मुद्दे पर भी बात हो सकती है, ऐसा विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया|