रियल एस्टेट सेक्टर में नौ प्रतिशत बढ़ा निवेश

Real Estate Sector

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। वैश्विक संपत्ति सलाहकार कोलियर्स के अनुसार, भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश 2019 में नौ प्रतिशत बढ़कर 43,780 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म कोलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल रियल एस्टेट सेक्टर में हुए कुल निवेश में 46 प्रतिशत यानी 19,900 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अकेले ऑफिस प्रॉपर्टी की रही।

2018 की तुलना में 2019 में भारत की अचल संपत्ति में निवेश 8.7 प्रतिशत बढ़ा और $ 6.2 बिलियन (43,780 करोड़ रुपये) को छू गया। कोलियर्स ने एक रिपोर्ट में कहा, 2019 में कुल निवेश का लगभग 78 प्रतिशत विदेशी धन है, जो अब तक का सबसे अधिक हिस्सा है।

कोलियर्स ने अनुमान लगाया है कि 2020 में रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़कर 6.5 बिलियन डॉलर (46,170 करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा। कोलियर्स इंटरनेशनल इंडिया के एमडी एवं चेयरमैन सैंकी प्रसाद ने कहा, ‘हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निर्माणाधीन ऑफिस प्रॉपर्टी समेत तमाम ऐसी संपत्तियों पर गौर करें, जिनकी आइटी सेक्टर से जुड़े बाजारों में बड़ी मांग हो सकती है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणो जैसे शहर निवेशकों को जोरदार मौके दे रहे हैं।’

मुंबई और दिल्ली-एनसीआर के साथ, बेंगलुरु को सबसे आकर्षक बाजारों में रैंक देना जारी रखना चाहिए। 2020-2023 के दौरान, कोलियर्स ने शीर्ष सात शहरों में 52 मिलियन वर्ग फुट पर वार्षिक औसत सकल अवशोषण का अनुमान लगाया, जो पिछले पांच वर्षों के सकल अवशोषण को 12 प्रतिशत से पार कर गया।

जारी आर्थिक मंदी के बावजूद, विदेशी फंडों को भारतीय रियल्टी में मजबूत पैर जमाने की संभावना है।

2019 के दौरान 655 मिलियन डॉलर (4,650 करोड़ रुपये) के निवेश के साथ निवेश के मामले में दिल्ली-एनसीआर को पछाड़कर बेंगलुरु दूसरे स्थान पर पहुंच गया। 2019 में कुल निवेश में 25 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ मुंबई निवेश के मामले में सबसे आगे रहा।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

नवंबर में हुआ 22,872 करोड़ का एफपीआई निवेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। नतीजतन, विदेशी निवेशकों का भारत के बाजार पर लगातार विश्वास बढ़ रहा है। और भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ता पैमाना विदेशी निवेशकों के मजबूत होते विश्वास को दर्शाता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर महीने में भारतीय बाजारों में 22,872 करोड़ रुपये की पूंजी लगायी है। उत्साहजनक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने ये पूंजी डाली है । डिपोजिटरी के आंकड़े के अनुसार विदेशी निवेशकों ने एक नवंबर से 29 नवंबर के दौरान ऋणपत्रों से 2,358.2 करोड़ रुपये निकाले, जबकि इक्विटी में उन्होंने 25,230 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस प्रकार कुल 22,871.8 करोड़ रुपये के एफपीआई ने निवेश किये।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड

Forex_Money-dollar

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। मोदीराज में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तीन दिसंबर तक बढ़कर 451.7 अरब डॉलर के नए स्तर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह बताया और उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में 38.8 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। यह हाल के वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।

बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।