आईएनएस विराट अब बन गया एक इतिहास 

28 सितंबर देश के इतिहास के पन्नों में काफी भावनात्मक और यादगार दिन के तौर पर जाना जायेगा। क्योकि गुजरात के शहर भावनगर के अलंग बंदरगाह में दुनिया में सबसे दुनिया में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले युद्धपोत आईएनएस विराट को तोड़ने का काम शुरू हो गया। भारतीय नौसेना ने तीन साल पहले इस युद्धपोत को सेवानिवृत्त कर दिया था। विमानवाहक पोत ने करीब 30 साल तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दीं। इसके नाम सबसे अधिक सेवा देने वाले युद्धपोत का गिनीज बुक में रिकॉर्ड है। करगिल युद्द के दौरान भी इसकी तैनाती कई स्थानों पर की गई थी। श्रीलंका ने जब शांति सेना भेजी थी तब भी श्रीलंका के आसपास आईएनएस विराट को तैनात किया गया था।

 

आईएनएस विराट 11 लाख किलोमीटर का सफर किया तय

आईएनएस विराट जैसा नाम वैसा ही इसका काम भी था। नौसेना में रहते हुए इस ऐतिहासिक युद्धपोत ने 11 लाख किलोमीटर की यात्रा की है जो समूची पृथ्वी के 27 चक्कर लगाने के बराबर है। नौसेना के इस गौरव ने 5 नौसनाध्यक्षों सहित 40 ध्वज अधिकारियों को अपनी सेवाओं के जरिए तैयार किया है। गौरतलब है कि पहले इसे म्यूजियम बनाने पर सरकार विचार कर रही थी लेकिन इसके लिए तैयार की गई कमेठी ने साफ कर दिया कि ये जहाज अब सिर्फ एक साल तक ही रखा जा सकता है जिसके बाद रिसाइक्लिंग’ के लिए दे दिया गया है।

1987 में भारतीय नौसेना का बना था हिस्सा

आईएनएस विराट को 1959 में ब्रिटिश नौसेना में शामिल किया गया था। तब इसका नाम एचएमएस हर्मिस था। 1984 में इसे सेवानिवृत्त कर दिया गया। बाद में इसे भारत को बेचा गया। भारतीय नौसेना में इसे 12 मई, 1987 में शामिल किया गया। आईएनएस विराट कई महत्वपूर्ण अभियानों में शामिल रहा। इनमें ‘ऑपरेशन ज्यूपिटर’ और 1989 में श्रीलंका में शांति बरकरार रखने का अभियान शामिल है। इसके अलावा 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद यह ‘ऑपरेशन पराक्रम’ में भी शामिल रहा। 38 करोड़ रुपए में श्रीराम ग्रीन शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज़ ने इसे निलामी में खरीदा है। कंपनी की माने तो इसे पूरी तरह ग्रीन तरीके से ही तोड़ा जायेगा जिससे पर्यावरण पर इसका कम असर पड़े। गौरतलब है कि 2017 में इस ऐतिहासिक जहाज को रिटायर करने के बाद कोच्चि में सबसे पहले इसके इंजन और जनरेटर निकाल लिए गए। इसके बाद में इस जहाज की वायरिंग को निष्क्रिय कर इसका रडार, पंखे, नेविगेशन उपकरण, ब्रिज रूम सहित दोबारा इस्तेमाल में आने वाले सभी उपकरण निकाल लिए गए थे।

समूची दुनिया में सच में हम भारतीय बहुत भावुक होते है तभी तो लोहे से तैयार एक युद्धपोत के जाने पर भी हमारी आंखे भर आती है इसके पीछे की वजह है हमारी भारतीय संस्कृति जो धरा के कण कण से प्रेम सिखाती है।