करतारपुर कॉरिडोर समझौते पर भारत- पाक ने किए हस्ताक्षर, 8 नवंबर को उद्घाटन

Indo-Pak signed Kartarpur corridor agreement

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता हो गया है। भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों ने गुरुवार को करतारपुर कॉरीडोर समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। भारतीय प्रतिनिधि का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने किया जबकि पाकिस्तान की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल मौजूद थे।

समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन का फ्रेमवर्क पूरा कर लिया गया। श्रद्धालु आज से prakashpurb550.mha.gov.in पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक के पास की सीमा से महज 4.5 किलोमीटर की दूरी पर है। यह पवित्र स्थल कॉरिडोर (गलियारे) के माध्यम से पूरे वर्ष भारतीय तीर्थ यात्रियों के लिए सुलभ रहेगा।

मालूम हो कि पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारे में प्रवेश के लिए बने इस कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर को पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर डेरा बाबा नानक मंदिर को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इस समझौते पर हस्ताक्षर होने में इतना समय इसलिए लगा क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच तीर्थ यात्रियों पर लगाए शुल्क को लेकर समझौता नहीं हो रहा था।

पाकिस्तान इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करने वाले तीर्थ यात्रियों पर प्रति यात्री 20 डॉलर (करीब 1420 रुपए) की रजिस्ट्रेशन फीस लगा रहा था। हालांकि इस राशि को कम करने के लिए भारत ने कई बार आग्रह किया और श्रद्धालुओं से 20 डॉलर लेने के मसौदे पर असहमति जताई है। इसके बाबजूद आर्थिक तौर पर तंगी झेल रहे पाकिस्तान ने इस अवसर को लपकते हुए यात्रियों पर रजिस्ट्रेशन फीस कम न करने का फैसला बरकरार रखा।

पाकिस्तान ने रोजाना 5 हजार श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब में माथा टेकने की इजाजत दी है। ऐसे में हर साल 18 लाख सिख श्रद्धालुओं से पाकिस्तान को 259 करोड़ रुपए मिलेंगे।

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था 5 नवंबर और दूसरा जत्था 6 नवंबर को रवाना होगा। श्रद्धालु करतारपुर की वीजा फ्री यात्रा कर सकेंगे। उन्हें बस एक वैध पासपोर्ट की आवश्यकता पड़ेगी। श्रद्धालु सुबह यात्रा प्रारंभ करेंगे और उसी दिन वापस लौट जाएंगे। यह कॉरिडोर पूरे साल खुला रहेगा।

सिखों के लिए क्यों खास है करतारपुर?

करतारपुर कॉरिडोर सिखों के लिए सबसे पवित्र जगहों में से एक है। करतारपुर साहिब सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव जी का निवास स्थाेन था। गुरु नानक ने अपनी जिंदगी के आखिरी 17 साल यहीं गुजारे थे। उनके माता-पिता और उनका देहांत भी यहीं पर हुआ था। इस लिहाज से यह पवित्र स्थल सिखों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।