गरीबी से नोबल पुरस्कार, ऑस्कर पुरस्कार, TRP मिलती है, फिर ‘गरीबी’ को क्यों मरने दिया जाए?

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दर्दनाक है मजदूरों को इस हाल में देखना। पहले विस्थापन का दंश अब अपने घर लौटने में भी दंश।

‘गरीबी’ हमेशा से एक हथियार रहा है चाहे वो बीते कल की बात करें या अभी की बात करें। ‘गरीबी’ सत्ता दिलवाती है, ‘गरीबी’ नोबल पुरस्कार दिलवाती है, गरीबी ऑस्कर दिलवाती है, गरीबी TRP दिलवाती है, फिर ‘गरीबी’ को क्यों मरने दिया जाए?

ये सब अच्छा लगता है अपने घरों में बैठ कर फ़ेसबुक और ट्विटर पर लिखने में। ना जानें कितनी कहानियाँ आई हैं कि लोगों ने अपने घर मे काम करने आने वाली मेड की छोटी सी सैलरी बंद कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर तो अपना चेहरा बनाएंगे।

 

सवाल उठाना अपने आप में हम सबको जिम्मेदार बनाता है। लेकिन हमारी जिम्मेदारी एक पोस्ट तक सीमित रहती है। हाँ, यह तय है कि सबसे बड़ी जिम्मेवारी सरकार की होती है चाहे वो राज्य सरकार हो या केंद्र की सरकार, चाहे वो किसी पार्टी की सरकार हो। अभी के हालत में इतना तय है कि सरकार उन गरीबों के घर जाने की तड़प को भांप नहीं पाई। एक ऐसी विपत्ति में हर कोई अपने घर जाना चाहेगा। सरकार की कोशिश रही कि जो जहां है वहीं रोका जाए, ताकि कोरोना महामारी को फैलने से रोका जाए। लेकिन सरकार में बैठे लोग शायद यह आकलन करने में चूक गए कि ये वो लोग हैं जो हमेशा से अविश्वास से पीड़ित रहे हैं। उनका जीवन भी एक कमरे से कम में सीमित रहती है। वो रोज कमाते हैं रोज खाते हैं। यह ऐसे लोग हैं जिन्होंने हमेशा झटके खाए हैं, फिर ऐसे में यह मान लेना कि सरकार की अपील को मान कर ये चुपचाप अपनी तंग कोठरी में पड़े रहेंगे, अपने आप में बेमानी है। फिर विश्वास राज्य सरकारों पर था कि वो उन्हें संभाल कर रखेंगे, खाने की व्यवस्था करेंगे।

पता नहीं वर्तमान कितना सबक सिखाएगा लेकिन Unorganized होना सबसे बड़ा कारण बंता है इन तक सरकारों को पहुँचने में। इसमें दोष इनकी परिस्थितियों का भी है, दोष विश्वास की कमी की भी है, स्वतंत्रता के बाद भारत की स्थिति पर भी है, उसके बाद बनी हर सरकारों पर भी है। इतना तय है कि यह समस्या एक दिन का नहीं है, ना ही एक दिन में खत्म होने वाली है। भविष्य में इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए एक राष्ट्रीय नीति जरूरी है और शायद National Population Register (NPR) इसमे अहम भूमिका निभा सकती है। लेकिन NPR का सिर्फ राजनीति के नाम पर विरोध अपने आप में दुखद है। जन धन योजना, उज्ज्वल योजना, जीवन बीमा योजना, ऐसे कई योजनाएँ हैं जिनसे इनलोगों को काफी फायदे हुए। लेकिन तात्कालिक उपाय अभी बहुत जरूरी है। अगर इस घटना से भी आँख नहीं खुलती है तो ‘गरीबी’ अपना काम करते रहेगा सत्ता दिलवाने के लिए, अवॉर्ड दिलवाने के लिए और TRP और पोस्ट लाइक बढ़ाने के लिए। उम्मीद और विश्वास उनमें जगाने की सबसे बड़ी जरूरत है।

 


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