भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पंहुचा 476.12 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 476.12 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। स्वर्ण भंडार में इजाफे से यह संभव हो पाया है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 21 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा के भंडार में 2.90 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई और यह 476.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।

इसके साथ ही स्वर्ण भंडार 53.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 29.66 अरब डॉलर हो गया। बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की इकोनॉमी दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की कर रही है। भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इतना ही नहीं एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 तक भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा।

इकोनॉमी के लिए क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा भंडार?

देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है। जैसे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जब सात महीनों के लिए देश के प्रधानमंत्री थे, तब देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। तब भारत की अर्थव्यवस्था भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया था। उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था।

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया।

आइयें हम उन संकेतों पर नजर डालते हैं, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है:

जनवरी में आठ साल के उच्चतम स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई

देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में काफी तेजी आयी है। साल 2020 के पहले माह यानी जनवरी में देश में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार हुआ है। मासिक सर्वेक्षण आईएचएस मार्किट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स (मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई) जनवरी में 55.3 अंक रहा है। यह आंकड़ा साल 2012 से 2020 की अवधि में सबसे ऊंचा स्तर है। यानी यह आठ साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।इससे पिछले माह यानी दिसंबर में यह 52.7 अंक था। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 53.9 अंक था। लगातार 30वें महीने मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में सुधार आना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। मांग में सुधार आने से पीएमआई उच्च स्तर पर पहुंचा है। इसके कारण नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी में बढ़त देखी गई है। एक निजी सर्वे में सामने आया है कि मांग में आई उछाल से कारखानों में मजदूरों की मांग बढ़ गई है। जिस रफ्तार से कारखानों में नए मजदूरों की भर्ती की गई, वह पिछले आठ सालों में सबसे अधिक है।

फरवरी में अब तक एफपीआई ने किया 23,102 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों की वजह से देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है और पूंजी बाजार में देश के ही नहीं, विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। वैश्विक मंदी के इस दौर में फरवरी महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने घरेलू बाजार में 23,102 करोड़ रुपये विदेशी निवेश किया है।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, तीन फरवरी से 20 फरवरी के दौरान एफपीआई ने इक्विटी में 10,750 करोड़ रुपये और बांड श्रेणी में 12,352 करोड़ रुपये लगाये हैं। इस दौरान आलोच्य अवधि में एफपीआई का कुल निवेश 23,102 करोड़ रुपये रहा।

FDI के मोर्चे पर भारत ने चीन को पछाड़ा

भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।