संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी और मजबूत, जर्मन राजदूत ने भारत की जोरदार वकालत की

walter j. lindner

PM मोदी के कार्यकाल में भारत का रुतबा दिन प्रतिदिन नयी ऊँचाइयों को छू रहा है। आज विश्व मंच पर भारत की बात प्रभावी तरीके से सुनी जा रही है। अब भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर लिंडनर ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में शामिल किए जाने की जोरदार वकालत की है। वाल्टर ने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखे हुए ये दोनों ही देश यूएनएससी में शामिल किए जाने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। लिंडनर ने कहा कि अगर यूएन में जल्द ही बदलाव नहीं किया जाता है तो लोग उस पर भरोसा करना छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही विश्व की सबसे बड़ी संस्था में रिफॉर्म नहीं किया जाता है तो लोग ये समझेंगे कि ये वास्तविकता से काफ़ी दूर हैं। उन्होंने आश्चर्य जताया कि 140 करोड़ की जनसँख्या वाला भारत यूएनएससी का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि ये अस्वीकार्य है। लिंडनर ने कहा कि भारत, ब्राज़ील, जापान और जर्मनी सुरक्षा परिषद की सदस्यता को लेकर एक-दूसरे का समर्थन करते आए हैं। उन्होंने जोड़ा कि भारत को इस संस्था में ज़रूर होना चाहिए।

PM Modi & German Chancellor Merkel | PC - Twitter

भारत और जर्मनी कई वैश्विक मुद्दों पर एक साथ काम कर रहे हैं। पिछले ही महीने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल भारत दौरे पर आई थीं। उस दौरान दोनों देशों के बीच 20 से भी अधिक करार (MOU) पर तेज़ी से आगे बढ़ने का फ़ैसला लिया गया था। दोनों देश स्मार्ट सिटी, ग्रीन मोबिलिटी और क्लाइमेट चेंज पर साथ काम कर रहे हैं।

वहीं जम्मू कश्मीर की ताज़ा परिस्थितियों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वहाँ इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबन्ध स्थायी नहीं हैं और जर्मनी बाकी देशों की तरह चाहता है कि ये सभी प्रतिबन्ध जल्द से जल्द हटाए जाएँ। लिंडनर ने जम्मू कश्मीर को भारत का घरेलू मुद्दा बताया लेकिन साथ ही कहा कि पूरे यूरोप का यही रुख है कि प्रतिबन्ध जल्द से जल्द हटाए जाएँ।

उन्होंने माना कि यूएन कई मुद्दों पर विफल भी रहा है लेकिन यही एक वैश्विक संस्था है, जिसने दुनिया को बाँधे रखा है। उन्होंने कहा कि यूएन में रिफॉर्म का अर्थ होगा इसे और ज्यादा विश्वसनीय और स्वीकार्य बनाना। जर्मन राजदूत ने कहा कि आज कई मुद्दों पर भारत और जर्मनी समान राय रखते हैं।

सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता को कई देशों का समर्थन

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी अबॉट ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि आज दुनिया में कोई एक देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जगह पाने का हकदार है तो वह भारत है। उन्होंने कहा कि सैन्य शक्ति और आर्थिक शक्ति, दोनों के हिसाब से देखें तो भारत सुरक्षा परिषद में जगह पाने का अधिकारी है।

संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता पर फ्रांस ने भारत का समर्थन किया है। उसने कहा है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्या मिलना बेहद जरुरी है। फ्रांस ने यूएन में इस मामले में भारत समेत कई अन्य देशों का भी समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के राजदूत ने कहा कि भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे देशों को सुधार और समकालीन वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की बहुत जरुरत है, संयुक्त राष्ट्र में इन देशों को सदस्यता दिलाना फ्रांस की प्राथमिकताओं में से एक है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल से अभी तक विभिन्न देशों की यात्राएं कीं और अपने संबंधों में सुधार कर उनका समर्थन भी हासिल किया अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों के राजदूत और नेताओं को भारत के पक्ष में लाकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए लगभग सभी देशों का समर्थन हासिल कर लिया।

UNSC में भारत को स्थायी सदस्य बनाने के लिए 55 से अधिक देशों ने भारत की सदस्यता को सहमति दी है|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बना है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है।बता दे कि UNSC का स्थायी सदस्य बनने से भारत को सुरक्षा के नजरिये से एक नयी पहचान और मजबूती मिलेगी|