अंतरिक्ष में भारत की बड़ी कामयाबी- RISAT-2B सैटेलाइट अंतरिक्ष में स्थापित

satellite_RISAT-2B

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने बुधवार को फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आज सुबह साढ़े 5 बजे रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट यानी RISAT-2B को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। 615 किलोग्राम का ये रॉकेट आकाश में भारत की खुफिया क्षमताओं को और मज़बूत करने में मददगार साबित होगा। RISAT-2B का इस्तेमाल फॉरेन साइंस और डिजास्टर मैनेजमेंट में किया जाएगा। इस सैटेलाइट की मदद से देश के दुश्मनों के ऊपर भी नजर रखा जायेगा।

रीसैट-2बी सेटेलाइट (RISAT-2B Satellite) को सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने के लिए 26/11 मुंबई हमलों के बाद विकसित किया गया है। इसे अंतरिक्ष में भारत की खुफिया आंख माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसरो इस सीरीज के पांच और सेटेलाइटों- रीसैट-2बीआर1, रीसैट-2बीआर2, रीसैट-1ए, रीसैट-1बी, रीसैट2ए की भी लॉन्चिंग करेगा।

PSLV_RISAT-2B_launched

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के मुताबिक, ‘RISAT-2B’ को प्रक्षेपण यान पीएसएलवीसी46 से लॉन्च किया गया। पीएसएलवी-सी46, ने रिसेट-2बी उपग्रह को 555 किलोमीटर की ऊंचाई पर महज 15 मिनट 30 सेकेंड में सफलतापूर्वक स्थाकपित किया। आज बुधवार को सुबह साढे पांच बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से पीएसएलवी-सी46 को अपने 48वें मिशन अभियान पर लॉन्च किया गया।

माना जा रहा है की इस उपग्रह की मदद से अब बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों की तस्वीरें भी ली जा सकेंगी। बीते 26 फरवरी को जब भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्रा इक की थी तो उस वक्तय मौसम खराब था और आसमान में घने बादल थे। तब अंतरिक्ष में मौजूद भारतीय उपग्रह क्लाउडी परिस्थितीयों के चलते ऐसी घटनाओं की तस्वीरें या वीडियो लेने में सक्षम नहीं थे। लेकिन, अब हमारी सेनाओं को सर्जिकल स्ट्राइक या हवाई हमलों के पुख्ता सबूत आसानी से मिल जायेगा जो देश की विपक्षी पार्टियां को सबूत के तौर पे देने के बहुत काम आयेंगे।

इसके अलावा RISAT-2B Satellite का कृषि, वन एवं आपदा राहत कार्यों में मदद लिया जा सकता है। इसकी मदद से बाढ़ और तूफान के कारण हुए नुकसान का आकलन करने में आसानी होगी। साथ ही फसलों के उत्पादन का अनुमान भी लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तरह की निगरानी तकनीक कुछ ही देशों के पास है।

गौरतलब है की आरआईसैट सीरीज का पहला सैटेलाइट 20 अप्रैल 2009 को लॉन्च किया गया था। और आरआईसैट-1 को 26 अप्रैल 2012 को लॉन्च किया गया था।