IAF ने बताया फ्यूचर प्लान, स्वदेशी तकनीक से बने भारत के 5वीं पीढ़ी के सुपर फाइटर दिखाएंगे अपनी ताकत

Air Chief Marshal Rakesh Kumar Singh Bhadauria

इंडियन एयरफोर्स हथियारों और लड़ाकू विमानों के स्वदेश में विकास का पुरजोर समर्थन कर रहा है। तभी तो इंडियन एयरफोर्स ने पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी सुपर फाइटर एयरक्राफ्ट (एफजीएफए) के विकास के साथ-साथ पहले 123 मार्क-I जेट्स को अपने बेड़े में शामिल करने के बाद 200 तेजस मार्क-II कॉम्बेट एयरक्राफ्ट के लिए भी अपनी तत्परता दिखाई है। यानी अब इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के बेड़े में तेजस मार्क-II एयरक्राफ्ट्स भी शामिल किए जाएंगे।

एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार भदौरिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के प्रति आईएएफ प्रतिबद्ध है। फिलहाल फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट को आयात करने का कोई विचार नहीं है। अब अपने देश में ही कॉम्बेट एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाएगा। स्वदेशी एमसीए यानी अडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। हम इसमें पूरे जी-जान से काम कर रहे हैं।

ख़बरों के अनुसार, अब आईएएफ का पूरा ध्यान ट्विन इंजन एमसीएमए (MCMA) पर है, जिसमें चुपके से वार करने की गजब ताकत होगी। इसमें मल्टि-सेंसर इंटिग्रेशन और सुपरक्रूज संबंधी ताकत भी होगी। इसका निर्माण डीआरडीओ, एरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स मिलकर करेंगे। इसके लिए स्विंग रोल एएमसीए प्रोटोटाइप 2024-2025 तक रोल आउट होगा और पहली टेस्ट फ्लाइट उसके एक या दो साल बाद होगी।

वायु सेना प्रमुख ने कहा कि एमके 1 ए संस्करण के 83 जेट विमानों के लिए आदेश के बाद, भारतीय वायुसेना अधिक उन्नत एमके 2 संस्करण के बड़े आदेश के लिए जाएगी। “एएमसीए और एलसीए एमके 2 समानांतर परियोजनाएं होंगी। उनके पास अलग-अलग टीमें होंगी और स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेंगे”।

आने वाले वक्त में आईएएफ सिंगल इंजन तेजस पर फोकस करेगा ताकि वह अपने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में कमी को दूर कर सके। फिलहाल इनकी संख्या 30 है, जबकि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से निपटने के लिए इनकी संख्या 42 होनी चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या वायु सेना विमान विकास के लिए डीआरडीओ पर पूरी तरह निर्भर हो सकती है, वायु सेना प्रमुख ने कहा कि वह मेक इन इंडिया पर पूरा भरोसा करते है और किसी को भी स्वदेशी क्षमताओं पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आने वाले समय में मेक इन इंडिया पर हमारा मुख्य फोकस बना रहेगा। विदेशी निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी सिस्टम को शामिल करना जारी रहेगा।”

114 मल्टीरोल लड़ाकू के भविष्य के अधिग्रहण पर, IAF प्रमुख ने कहा कि 114 लड़ाकू को भारत में बनाने के लिए आवश्यकता (AON) की स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया शीघ्र ही ले ली जाएगी।

पिलेट्स के मूल ट्रेनर प्रोजेक्ट के बारे में पूछे जाने पर, वायु सेना प्रमुख ने कहा कि स्विट्जरलैंड से इन विमानों में से 38 से अधिक विमानों को खरीदने के लिए मामला खत्म कर दिया गया है और स्वदेशी HTT-40 वायुसेना के लिए अगला ट्रेनर विमान होगा।