कोरोना के बीच विदेश मंत्रालय की कूटनीति, खाड़ी देशों की मदद करके उन्हें बना रहे मददगार

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कोरोना संकट के बीच भारत खाड़ी देशों का बड़ा मददगार बना है। इन देशों में दवाइयों की आपूर्ति के अलावा खाद्य सामग्री की आपूर्ति भारत ने सुनिश्चित की है। रमज़ान की शुभकामनाओं के बहाने दो दिनों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पांच खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है। पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीसीसी देशों सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान के नेताओं के साथ-साथ फिलिस्तीन, जॉर्डन और इजिप्ट के नेताओं के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी।

प्रधानमंत्री की बातचीत की कड़ी में विदेश मंत्री जयशंकर ने ने 23 अप्रैल को सऊदी अरब और ओमान के विदेश मंत्री से बात की। 24 अप्रैल को उन्होंने कतर, यूएई और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रियों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। भारत इसे थिंक वेस्ट डिप्लोमेसी के तहत अपनी प्राथमिकता के रूप में देख रहा है। इससे पहले जयशंकर बहरीन, कुवैत और अल्जीरिया के विदेश मंत्रियों से बात कर चुके हैं।

विदेशमंत्री ने रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के अवसर पर खाड़ी देशों के समकक्षों को शुभकामनाएं दीं।दवा और इलाज में सहयोग कई खाड़ी देशों ने कोविड -19 महामारी से निपटने के लिए सहयोग के तहत भारत से हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन और पैरासिटामाल जैसी आवश्यक दवाओं के लिए अनुरोध किया था। 

भारत ने सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर, मिस्र और फिलिस्तीन को इन दवाओं की आपूर्ति की है। ये आपूर्ति मानवीय सहायता के रूप में और वाणिज्यिक आधार पर हो रही है। सहयोग के लिए इन देशों ने भारत को सराहा है। कुवैत के अनुरोध पर, भारत ने डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स की एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम को वहां तैनात किया है।

खाड़ी के चिकित्साकर्मियों को वापस भेजेगा भारत

कुछ खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों ने अनुरोध किया कि उनके चिकित्साकर्मियों को जो इस समय भारत में हैं, उन्हें वापस जाने की अनुमति दी जाए। विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया है कि इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। कोविड संकट के बाद की तैयारी कोविड संकट के बाद की स्थिति पर भी खाड़ी देश अभी से चर्चा कर रहे हैं। खाड़ी देशों से बातचीत में आर्थिक सुधार, विशेषकर इसके ऊर्जा निहितार्थ पर चर्चा हुई है। भारत खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कच्चे तेल के लिए एक प्रमुख बाजार है।

 


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