चीन के BRI रणनीति का भारतीय जवाब – 63 देशों को आर्थिक सहयोग

Indian Response to China's BRI Strategy

पिछले हफ्ते सांसदों की बैठक में सरकार से सवाल पूछा गया कि, “चीन के BRI (बॉर्डर रोड्स इनिशिएटिव) के मुकाबले भारत क्या कर रहा है| सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री वी.मुरलीधरन ने संसद में कहा कि, “भारत चीन के तरह दुनिया में अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश में नहीं है| बल्कि भारत चाहता है की उसके पडोसी देश भी तरक्की करें और आगे बढ़ें|”

असल में बॉडर रोड इनिशिएटिव (BRI) चीन सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत वो दुसरे देशों की परियोजनाओ में निवेश करता है और इस तरह ‘ड्रैगन’ विश्व भर में अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है| चीन इस परियोजना में अब तक खरबों रुपयों निवेश कर चूका है|

पर अब खबर ये आ रही है कि चीन अपने तय पैमाने और महत्वाकांक्षा से पिछड़ता दिख रहा है| वहीँ दूसरी तरफ हमारा देश भारत इस बात का फायदा उठा रहा है| जी हाँ भारत रियायती लाइन्स ऑफ क्रेडिट (LOC) पर आधारित विकासात्मक सहयोग साझीदारी के तहत 63 देशों में आर्थिक परियोजनाओं पर काम कर रहा है|

सूत्रों के अनुसार वर्तमान में भारत ने 63 देशों को 279 लाइन्स ऑफ क्रेडिट दिया है वहीँ इन देशों को विभिन्न परियोजनाओ के लिए भारत ने 28 अरब डॉलर का लोन दिया है| ये परियोजनाएं एशिया, अफ्रीका, लातिना अमेरिका, कैरिबियन और ओसियानिया देशों में चल रही हैं | सरकार से संसद में पूछे गए सवाल पर इन आंकड़ों को पेश किया गया|

V Murlidhran

विदेश राज्य मंत्री वी.मुरलीधरन ने इस बारे में पूरी जानकारी देते हुए कहा, “इनमें 254 परियोजनाएं करीब 4.70 अरब डॉलर की हैं जो की पूरी हो चुकी हैं, जबकि 194 परियोजना जो 19 अरब डॉलर की हैं उस पर काम चल रहा है| इनमें भारत के 5 पड़ोसी राज्य हैं जिनके साथ 94 संपर्क योजनाएं हैं, जिसकी लागत 6.6 अरब डॉलर है|

मुरलीधरन ने आगे कहा की भारत अपने विकासात्मक अजेंडे को मजबूत करने के लिए अपने साझेदार देशों के साथ कई परियोजनाओ पर महत्वपूर्ण संबंध बनाने का पूर्ण प्रयास कर रहा हैं जिनमें पड़ोसी देश भी शामिल हैं| गौरतलब है की भारत को इन प्रयासों में सफलता भी मिल रही है|

मुरलीधरन ने रियायती शर्तों पर लाइन्स ऑफ क्रेडिट के विस्तार को सामाजिक-आर्थिक विकास के विकासात्मक साझेदारी का महत्वपूर्ण अंग बताया है और इनमे शामिल क्षेत्र हैं बिजली, परिवहन, संपर्क कृषि, सिंचाई, विनिर्माण उद्योग, जल व स्वच्छता इत्यादि|

सरकार का मानना है की भारत की आर्थिक और कुटनीतिक पहल के लिए दुसरे अन्य देशों से भारत के संपर्क को मजबूत बनाना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है| दुसरे देशों से संपर्क भी सार्वभौमिक स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर होना चाहिए जिसमे पूरी पारदर्शिता रहे और वित्तीय जिम्मेदारियों का भीपुरा ध्यान रखा जाना चाहिए|

गौरतलब है की इस समय जब चीन की महत्वाकांछी योजना कमज़ोर पड़ रही है ऐसे में भारत के लिए ये सुनहरा अवसर है जब वो दुसरे देशों से अपने संपर्क को और भी मजबूत करें और ज़ाहिर सी बात है सरकार अपने कूटनीति से इस काम को पूर्ण रूप से अंजाम दे रही है|