भारतीय रेल केवल अपनो से ही नहीं मिलवाती बल्कि भारतीय संस्कृति के भी दर्शन करवाती है

भारतीय रेल ना केवल देश में आमजन के लिये एक यातायात का साधन है बल्कि वो हमारे देश की धड़कन भी है। रेल के जरिये देश की आर्थिक व्यवस्था को बढ़ाना हो या फिर देश की संस्कृति को जोड़ना भारतीय रेल हमेशा इस दिशा में एक कदम आगे ही रही है। इसी क्रम में अब आने वाले दिनों में भारतीय रेल गुरुद्वारा सर्किट ट्रेन चलाने जा रही है। जो देश के सिख समुदाय के लिये मोदी सरकार का एक उपहार होगा।

Indian Railways reprimanded for giving free tickets to officials | Times of  India Travel

 

भारतीय रेल चलायेगी गुरुद्वारा सर्किट ट्रेन

पीएम मोदी की एक सोच जल्द ही साकार रूप लेने जा रही है क्योंकि भारतीय रेल अब एक विशेष ट्रेन गुरुद्वारा सर्किट ट्रेन की शुरूआत करने जा रही है। जो देश के सभी बड़े गुरूद्वारा के दर्शन करवायेगी। 11 दिनों में ये ट्रेन अमृतसर में हरमिंदर साहिब से बिहार की राजधानी पटना के पटना साहिब, नांदेड़  महाराष्ट्र में हजूर नांदेड़ साहब और भटिंडा में दमदमा साहिब शामिल हैं। इस ट्रेन में अंबाला, सहारनपुर, लखनऊ, मनमाड, सूरत, अहमदाबाद, जयपुर, बठिंडा होते हुए पहुंचेगी। स्पेशल ट्रेन में स्लीपर क्लास और वातानुकूलित क्लास सहित 16 कोच होंगे। एसी श्रेणी में एक यात्री के लिए यात्रा की लागत प्रति यात्री प्रति दिन 900-1000 रुपये के बीच होगी। यानी देश की भव्य सिख संस्कृति के दर्शन भी अब होंगे वो भी किफायती दाम में।

 

रामायण और बौद्ध सर्किट स्पेशल ट्रेन की भी की गई है शुरूआत

गुरुद्वारा सर्किट ट्रेन से पहले देश में रामायण और बौद्ध सर्किट स्पेशल ट्रेन भी रेलवे ने चलाई है जिसमें रामायण सर्किट के तहत आयोध्या से रामेश्वरम तक का सफर करवाया जाता है जिसके तहत भगवान राम जहां जहां रुके है उन स्थानो को रेल से जोड़ा गया है। वैसे ही बौद्ध सर्किट के तरह भारत से नेपाल तक जितने में भी बौद्ध तीर्थ स्थल है उनके दर्शन करवाये जाते हैं। यानी की पर्यटन के साथ साथ भारतीय संस्कृति से लोगों को रूबरू करवाया जा रहा है। जिससे भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में सभी को समझ में आ सके।

पीएम मोदी की सरकार जब से आई है तब से ही देश की संस्कृति को फिर से ऊबारने के लिये जोरदार तरीके से काम कर रही है। खासकर पर्यटन के जरिये लोगों को इसके बारे में बता रही है। तो रेल, बस और हवाई परिवहन से उसे जोड़ने की भी तेजी से कोशिश कर रही है। इसी क्रम में सिखों के गौरवशाली इतिहास को जानने के लिये सरकार की ये पहले एक मायने में बहुत सही कदम है। क्योंकि इससे देश ही नही विश्व भी भारत को जानेगा और पहचानेगा।

 

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