भारतीय मुसलमानों को डरने या चिंता करने की ज़रूरत नहीं : अमित शाह

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राज्यसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है। विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े जबकि 105 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। इसी के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम छह समुदायों को भारत की नागरिकता देने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है। साथ ही अमित शाह ने कल बताया कि इस बिल के बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है। कहा जा रहा है कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इस देश के मुसलमानों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। वे नागरिक थे, हैं और रहेंगे। मुसलमान किसी के बहकावे में नहीं आएं। उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे किसी के भी बहकावे में ना आएं और मोदी सरकार पर भरोसा रखें।

अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल के बारे में बताया कि यह बिल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान, जिन तीन देशों की सीमाएं भारत को छूती हैं, उन तीन देशों में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई, जो अल्पसंख्यक लोग भारत आए हैं, किसी भी समय आए हैं, उनको नागरिकता प्रदान करने का इस बिल में प्रावधान है। इसका मतलब आजादी के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से जो भी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के अनुसरण करने वाले आए हैं, उन्हें नागरिकता देंगे।

बिल में संशोधन के लिए कई प्रस्ताव लाए गए, जिनमें से अधिकांश ध्वनिमत से ख़ारिज हो गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बंटवारे के बाद पैदा हुए हालात के कारण ये विधेयक लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नेहरू-लियाक़त अली समझौते को भारत ने निभाया, लेकिन उसके तीन पड़ोसियों ने वादा नहीं निभाया।

उन्होंने कहा कि छह धर्म के लोगों को बिल में लाया गया है, लेकिन मुसलमानों को शामिल नहीं करने पर सवाल पूछे जा रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि वो बताना चाहेंगे कि मुसलमानों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया। अमित शाह ने बताया कि ये बिल हम तीन देशों के अंदर जो धार्मिक प्रताड़ना हुई है, उन्हें नागरिकता देने के लिए लेकर आए हैं।

जब मैं माइनॉरिटी शब्द का इस्तेमाल करता हूँ तो विपक्ष में बैठे लोग बताएंगे कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में इस्लाम को मानने वाले अल्पसंख्यक हैं क्या? देश का धर्म इस्लाम हो तो मुस्लिमों पर अत्याचार की संभावना कम है।

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गृह मंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यकों को चिंता करने की या डरने की ज़रूरत नहीं है, किसी की भी नागरिकता छीनी नहीं जाएगी और धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भ्रांति फैलाई जा रही है कि ये बिल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। जो इस देश के मुसलमान हैं उनके लिए इस बिल में कोई चर्चा या चिंता का उल्लेख नहीं है। अमित शाह ने साफ़ लफ्जों में कहा कि “देश के मुस्लिम सुरक्षित हैं और हमेशा सुरक्षित रहेंगे। उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। “

 


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