संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भारतीय राजनयिक का ज़बरदस्त प्रदर्शन, पस्त हुए पाकिस्तान और चीन के सारे मंसूबे

Syed Akbaruddin, India’s Ambassador to UN

आर्टिकल 370 की कहानी भले ही अब देश में और खासकर कश्मीर में ठंडी पड़ गयी हो पर पाकिस्तान को अभी भी ये बात हज़म नहीं हो रही है की कश्मीर अब उसके हाथ से निकल गया | अभी भी वो अपने बेकार को कोशिशों में लगा हुआ है ताकि किसी भी तरह भारतीय सरकार अपना ये फैसला वापस ले ले | इसी क्रम में बीते शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के अन्दर एक बंद कमरे की बैठक में चीन और पाकिस्तान ने मिलकर जम्मू-कश्मीर के मसले को अंतर्राष्ट्रीय मामला सिद्ध करने की पूरी कोशिश की | पर भारत के संयुक्त राष्ट्र के राजनयिक के दमदार तर्क और सबूत के वजह से पाकिस्तान और चीन के मंसूबों पर पानी फिर गया |

भारत के संयुक्त राष्ट्र के राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन के कोशिशों का नतीजा ये रहा की रूस ने संयुक्त राष्ट्र् की ‘बंद कमरे’ में बैठक शुरू होने से पहले ही जम्मून-कश्मी र को भारत-पाकिस्तांन का द्विपक्षीय मसला बता दिया | और जब बारी भारत की आई अपने दलील पेश करने की सैयद के शानदार तर्कों के सामने पाकिस्तान और चीन की एक भी दलील नहीं चली | सूत्रों का कहना है की संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजनयिक की जीत का पूरा श्रेय भारतीय विदेश मंत्रालय को जाता है जिसका नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र में भारत के वर्तमान प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन कर रहे है | आइये जानते है कौन है सैयद अकबरुद्दीन |

पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ सैयद अकबरुद्दीन

हाज़िरजवाबी और तर्कवाद के लिए मशहूर सैयद अकबरुद्दीन ने वर्ष 1985 में भारतीय विदेश सेवा जॉइन किया था | इसके बाद वे भारत के लिए साल 1995 से 1998 तक संयुक्त राष्ट्र में बतौर फर्स्ट सेक्रेटरी काम कर चुके | इसके साथ-साथ उन्होंने कई और देशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है जैसे की वे पाकिस्ता्न की राजधानी इस्लाबमाबाद में स्थित भारतीय उच्चाीयोग में काउंसलर रह चुके हैं और साथ ही अकबरुद्दीन सऊदी अरब और मिस्र में भी काम कर चुके हैं |

इसके अलावा सैयद वर्ष 2015 में हुए भारत-अफ्रीका फोरम समिट के चीफ कोआर्डिनेटर रह चुके हैं जिसमे चीन के दबदबा रहने के बावजूद सैयद को सफलता मिली | इसके साथ ही सैयद वर्ष 2012 से 2015 तक भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के पद पर भी रह चुके है | उन्हें पश्चिम एशिया का विशेषज्ञ भी माना जाता है |

सूत्रों के मुताबिक सैयद के पिता एस बदरुद्दीन हैदराबाद स्थित उस्मानिया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के हेड थे जिन्हें बाद में क़तर में भारत का राजदूत भी नियुक्त किया गया था और सैयद की माँ डॉ. ज़ेबा अंग्रेजी भाषा की प्रोफेसर थी | सैयद सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते है |

पाकिस्तानी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी

बीते शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की बैठक ख़त्म होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस रखा गया जहाँ पर पाकिस्तानी पत्रकारों ने मानवाधिकार और कश्मीर मसले से जुड़े, एक के बाद एक अपने सवालों को सैयद पर दागना शुरू कर दिया | पर रोचक बात ये रही की इन सवालों का बिलकुल सटीक और मुहतोड़ जवाब देकर सैयद ने पाकिस्तानी पत्रकारों को उनका मुह बंद करने पर मजबूर कर दिया |

पाकिस्तानी पत्रकारों ने आर्टिकल 370 से जुड़े सवालों को भी पूछने की कोशिश की पर राजनयिक ने साफ़-साफ़ कहा की जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने का फैसला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है |

चीन को भी दिया शख्त सन्देश

भारतीय राजनयिक ने पुरे आत्मविश्वास के साथ पाकिस्तान के तीनो पत्रकारों के हर सवाल का सटीक जवाब दिया | एक पत्रकार ने जब पूछा की कश्मीर मामले पर भारत इस्लामाबाद से कब बात करेगा इस पर सैयद ने अपना पोडियम छोड़ा और आगे आकर के पत्रकारों से हाथ मिलाया और कहा चलिए इसकी शुरुआत हम करते है | एक तरफ जहाँ सैयद हर पत्रकार के सवाल का जवाब दे रहे थे तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और चीन के प्रतिनिधि अपना बयान पढ़कर, बिना मीडिया से बात किए ही वहां से निकल लिए |

बैठक ख़त्म होने के बाद सैयद ने मीडिया से कहा की ऐसा पहली बार देख रहा हूँ की ‘दो देश अपने देश की राय को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे |’

कई बार दिला चुके है भारत को सफलता

क्रिकेट के शौक़ीन सैयद ने कई बार अपने हाज़िरजवाबी और आत्मविश्वास से भरे अपने जवाबों से कई मौकों पर भारत को सफलता दिलाई है | फ़रवरी 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद अमेरिका के एक रिपोर्टर ने सैयद से भारत के अगले कदम को लेकर कई उकसावे से भरे सवाल पूछे पर सैयद ने अपना सियाम कायम करते हुए रिपोर्टर के सभी सवालों के जवाब दिए |

यूएनएससी में इसी साल 9 जुलाई को एक बहस के दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना दाऊद इब्राहिम, लश्कएर-ए-तैयबा की मदद करने के लिए उसे धो डाला था | सौ बात की एक बात है की सैयद अकबरुद्दीन शांत, होशियार, और आत्मविश्वासी राजनयिक है | उनके सटीक हाज़िरजवाबी और उनके बुद्धी को देखते हुए ही उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक नियुक्त किया गया |