भारतीय सेना को मिली आसमानी और जमीनी ताकत, अभ्यास ड्रोन और अर्जुन टैंक बनेगा दुश्मनों का काल 

मोदी राज में भारत की सेना की ताकत हर दिन तेजी से बढ़ रही है। मोदी सरकार जहां एक तरफ नये हथियार खरीद रही है तो दूसरी तरफ देश में भी एक से एक बढ़कर हथियार बनाये जा रहे है जिससे देश सेना के मामले में आत्मनिर्भर हो रहा है। इसी क्रम में भारतीय सेना को पिछले दो दिनों में नई ताकत मिली है। भारत ने लड़ाकू ड्रोन अम्यास और अर्जुन टैंक से लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक मिसाइल दागने का सफल परीक्षण किया है।

क्या है ‘अभ्यास’?

‘अभ्यास’ एक हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टार्गेट है, जिसे एडीई में विकसित किया गया है। डीआरडीओ के मुताबिक, यह हथियार प्रणालियों को परीक्षण के लिए एक रियलिस्टिक खतरा सीनेरियो देता है, जिसकी मदद से विभिन्न मिसाइलों या हवा में मार करने वाले हथियारों का परीक्षण किया जा सकता है। अभ्यास लड़ाकू ड्रोन को ऑटोपायलट की मदद से स्वायत्त उड़ान के लिए तैयार किया गया है।

जबर्दस्त है अभ्यास का डिजाइन

अभ्यास को DRDO के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इसे ट्विन अंडरस्लैंग बूस्टर का उपयोग करके लॉन्च किया गया है। DRDO ने अभय को एक इन-लाइन छोटे गैस टर्बाइन इंजन पर डिज़ाइन किया है। यह डिवाइस स्वदेशी रूप से विकसित माइक्रो-इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम-आधारित प्रणाली है। इसका प्रयोग नेविगेशन के लिए किया जाता है। DRDO ने इसे खास तरह से डिजाइन किया है। पूरे ढांचे में पांच मुख्य हिस्से हैं जिसमें नोज कोनइक्विपमेंट, ईंधन टैंक, हवा पास होने के लिए एयर इंटेक बे और टेल कोन हैं। अभ्यास ड्रोन एक छोटे गैस टर्बाइन इंजन पर काम करता है। यह एमईएमएस नेविगेशन सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर के सहारे चलता है। अभ्यास को पूरी तरह से स्वायत्त उड़ान के लिए तैयार किया गया है। अभ्यास के रडार क्रॉस-सेक्शन और विजुअल-इंफ्रारेड सिग्नेचर का प्रयोग विभिन्न प्रकार के विमानों और हवाई सुरक्षा उपकर्णों में किया जा सकता है। यह जैमर प्लेटफॉर्म और डिकॉय के रूप में भी कार्य कर सकता है।

लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक मिसाइल भी दाग सकेगा अर्जुन

चीन के साथ विवाद के बीच भारत ने रक्षा सेक्टर में एक और छलांग लगाई है। भारत में तैयार किया गया अर्जुन टैंक अब लेजर गाइडेड ऐंटी टैंक मिसाइल छोड़ने में भी सफल साबित हुआ। DRDO  के टेस्ट में ये सफलता हाथ लगी है यानी आने वाले दिनो में अर्जुन टैंक दुश्मन मुल्क के लिए और काल साबित होगा। DRDO की माने तो 3 किलोमीटर दूर अपने निशाने पर अर्जुन टैंक ने सटीक निशाना लगाया है। खास बात तो ये है कि ये पूरी तकनीक भारत में ही विकसित की गई है। जिससे रक्षा के क्षेत्र में भारत और अधिक आत्मनिर्भर हो गया है।

 

ऐसे में अगर ये बोले कि पिछले दो दिन भारत के लिए रक्षा सेक्टर के लिए काफी अच्छे साबित हुए है तो गलत नही होगा क्योकि DRDO के दोनो परीक्षण पूरी तरह से सफल हुए है जो भारत को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने में और दुश्मन की आफत बढ़ाने के लिए काफी है।