कोरोना को हराने के लिए सेना हुई अलर्ट मोड पर

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कोरोना को हराने के लिए सेना हुई अलर्ट मोड पर 

देश में कोरोना वायरस को लेकर जिस तरह के हालात सामने आ रहे है,उसको देखते हुए अब देश की शान कहे जाने वाली फौज को अलर्ट मोड में रहने को कह दिया गया है। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ ने फौज के अधिकारियों से बात करने के बाद इस बात का ऐलान किया की कोरोना से निपटने के लिये सेनाओं को अलर्ट मोड पर रख दिया गया ह। 

देश में कोरोना वायरस अपना दम न दिखा पाये, इसके लिये मोदी सरकार लॉकडाउन करके इस माहामारी को एक हद तक रोक दिया था, लेकिन तबलीगी जमात का मामला सामने आने के बाद अब देश में कोरोना का खतरा न बढ़े इसलिये फौज को अलर्ट कर दिया गया है। कोरोना से जंग की सबसे नाजुक स्थिति करीब आने पर चिकित्सा से जुड़े साजो-सामान लाने-ले जाने के लिए वायुसेना की ट्रांसपोर्ट फ्लीट तैयार है, तो युद्धपोत भी किसी भी स्थिति में तैनाती के लिए अलर्ट पर हैं। तो सेना के 8,500 डॉक्टर भी किसी प्रकार की आपात स्थिति निपटने को कमर कस चुके है। 

सेना के 8,500 डॉक्टर भी तैयार

सेना के 8,500 डॉक्टर और सपोर्ट स्टाफ भी कोरोना से निपटने के लिए सिविल प्रशासन को मदद देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सेना रिटायर्ड हेल्थ प्रोफेशनल्स को भी मदद के लिए तैयार रहने को कहा है। इसके अलावा NCC के 25,000 कैडेट्स को सिविल प्रशासन की मदद के लिए तैयार किया जा रहा है।

सेनाएं क्वारंटीन की पहले की कर चुकी हैं पहल

यू तो सुरक्षा बल पहले से ही कोरोना से निपटने के लिए क्वांरटीन सुविधाओं की तैयारी कई राज्यों में कर चुकी है  इशके साथ साथ डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट जरूरी मेडिकल उपकरण बना रही है। वायुसेना को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर और नगालैंड में मेडिकल सप्लाई पहुंचाने के लिए तत्काल ऐक्टिव कर दिया गया है।

 

वायुसेना का ट्रांसपोर्ट बेड़ा ऐक्टिव

दूर और जिन जगहों पर रेलवे सामान नहीं हुंचा पा रहा है वहां पर सामान पहुंचे की जिम्मेदारी अब सेना ने संभाली है जिसके चलते नार्थ ईस्ट के राज्यों में मदद भी पहुंचाई गई है।पिछले 3 दिनों में 25 टन सप्लाई को गंतव्य तक पहुंचाया है। वायुसेना ने बताया कि पूरे देश में मांग पूरी करने के लिए उसने अपने सभी ट्रांसपोर्ट बेड़े को तैयार रखा है। सी-17 हेवी लिफ्टर, AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट और सी-130J स्पेशल ऑपरेशन एयरक्रॉफ्ट को सिविल प्रशासन के आग्रह पर ऐक्टिव किया जा रहा है। वायुसेना और नौसेना छोटे डॉनियर विमान को भी सप्लाई से मोर्चे पर लगा रखा है। ये दोनों सेनाएं मेडिकल टीम द्वारा टेस्ट किए जा रहे सैंपल को तत्काल सही जगह पहुंचा रही है। इसके साथ साथ सप्लाई जैसे पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट, हैंड सेनेटाइजर्स, सर्जिकल गलव्स, थर्मल स्कैनरल और मेडिकल कर्मचारियों को एक-जगह से दूसरे जगह पहुंचाया जा रहा है।

युद्धपोत भी पूरी तरह तैयार

कोरोना से हालात अगर बिगड़ते है तो नौसेना के युद्धपोत भी स्टैंडबाइ मोड में रखा गया हैं। ताकि तटीय इलाकों में जरूरी पड़ने पर बड़े पैमाने पर सामान की आपूर्ति की जा सके। दो युद्धपोत को पड़ोसी देशों की मदद के लिए पहले से ही तैयार रखा गया है। अगर जरूरत पड़ी तो दूसरे युद्धपोत को भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

मतलब साफ कि फौज हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। और जब देश की सेना किसी भी अपदा से निपटने के लिये आगे आती है तो समझ लीजिये कि वो आफत पर भर में ही खत्म हो जाती है। यानी की कोरोना वायरस का अब अंत समय भारत में आ पहुंचा है। लेकिन कोरोना को हराने में हमे भी सेना के सिपाही का रोल अदा करना होगा और सरकार की गाइडलाइस को पूरी तरह से मानना होगा जिससे जीत हम और हमारा देश इस मुसीबत से बच सकें। 


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