अनुशासन, इंसानियत और शराफत: भारतीय सेना का चरित्र – सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना का चरित्र अनुशासन, इंसानियत और शराफत का सम्मिश्रण है साथ ही भारतीय सेना पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है।

“युद्धकाल में और युद्धबंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण” विषय पर मानवाधिकार भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के ट्रेनी और सीनियर अफसरों को संबोधन में सेनाध्यक्ष ने ये बातें कही।

जनरल बिपिन रावत ने अपने संबोधन में कहा, “भारतीय सशस्त्र बल बेहद अनुशासित हैं, वो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का अत्यधिक सम्मान करते हैं। न सिर्फ अपने देश के नागरिकों की, बल्कि भारतीय सशस्त्र बल दुश्मनों के मानवाधिकारों की भी रक्षा करते हैं| युद्ध बंदियों के साथ भारतीय सेना जिनेवा संधि के अनुसार व्यवहार करती है|

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने बताया कि यह कानून सेना को वहीं ताकत देता है जो पुलिस और सीआरपीएफ को तलाशी और जांच अभियानों में मिलता है। सैनिकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी कड़ाई से पालन किया जाता है| जो भी सैनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों में तैनात हैं उन्हें तैनाती से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है|

उल्लेखनीय है कि सेना ने 1993 में एक मानवाधिकार सेल का गठन किया था, इस सेल में सशस्त्र बलों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों का समाधान,और संबंधित पूछताछ की सुविधा शिकायात्कर्मियों के लिए थी| अब सेना के इस मानवाधिकार सेल को अपर महानिदेशक के नेतृत्व में निदेशालय के स्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है| इसमें अब पुलिसकर्मियों के साथ साथ सैन्य पुलिस बल की महिला कर्मियों को भी शामिल करने का फैसला किया गया है|