रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होता भारत: रूस से हथियार आयात 46 फिसदी घटा

पिछले सात सालों से भारत लगातार हर क्षेत्र में अपने बल पर खड़ा होता जा रहा है। खासकर रक्षा के सेक्टर में लगातार भारत अपने दम पर हथियार बना रहा है। इसका असर है कि भारत का हथियार आयात कम होता जा रहा है तो निर्यात बढ़ता जा रहा है। भारत अब 25 हथियार निर्यातक देशों में शामिल हो गया है तो रूस से हथियार का आयात 46 फिसदी घट गया है।

रूस से भारत का हथियार का आयात घटा

भारत ने हथियारों की खरीदारी के लिए रूस पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी की है। 2012-17 के दौरान जहां भारत अपने हथियारों के कुल आयात में से 69 फीसदी रूस से करता था, वहीं 2017 से 2021 के दौरान यह घटकर 46 फीसदी रह गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की  एक रिपोर्ट में दावा किया कि 2017-21 के दौरान भारत ने हथियारों के कुल आयात में 21 फीसदी की कटौती की, हालांकि इसके बाद भी वैश्विक स्तर पर हथियारों के आयात में अकेले भारत की हिस्सेदारी 11 फीसदी रही। 2012-2021 के दौरान लगातार रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है। हालांकि, इस दौरान भारत का रूस से होने वाला हथियारों का आयात 47 फीसदी कम हुआ है।

SIPRI ने बताया भारत के हथियार आयात में पांच वर्षों के दौरान आई इतनी गिरावट

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर

एसआईपीआरआई के मुताबिक भारत के यह प्रयास खुद को रक्षा तकनीक और हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की तरफ बढ़ाए गए कदमों की पुष्टि करते हैं, इसके अलावा भारत खुद को हथियारों की आपूर्ति के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं बनाए रखना चाहता है। यही वजह है कि 2017-21 के दौरान भारत के फ्रांस से हथियारों के आयात में दस फीसदी की वृद्धि हुई है। वही खुद रक्षा मंत्री की माने तो भारत ने 7 सालो में हथियार निर्यात करके करीब 38000 करोड़ रूपये की आमदनी करी है जो आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम है। इतना ही नही इशके साथ भारत हथियार बेचने वालों की सूची में 24 स्थान पर भी आ गया है जो ये बताता है कि आने वाले दिनो में भारत इस सेक्टर में भी कितनी तेजी के साथ काम कर रहा है।

यानी मोदी सरकार ने सेना को भी कमाई का साधन बना दिया है जहां पहले इसे सिर्फ खर्च करने वाला सेक्टर ही बोला जाता था लेकिन सरकार ने महज सात सालों में देश की सोच बदलकर ये मुकाम हासिल किया है।