नौसेना के लिए ‘रोमियो’ हेलिकॉप्टर खरीदेगा भारत

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• ट्रंप के दौरे से पहले भारत को मिली बड़ी खुशखबरी
• अमेरिका ने दी 2 अरब डॉलर की डील को मंजूरी
• भारत जल्द खरीदेगा मल्टीरोल हेलिकॉप्टर ‘रोमियो’

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपनी पत्नी के साथ भारत दौरे पर आने वाले है और इन दिनों भारत में उनके स्वागत की तैयारियां जोरो पर चल रही है। इसी बीच भारतीय नौसेना के लिए एक अच्छी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दौरे से पहले भारत ने नौसेना के लिए मल्टीरोल हेलिकॉप्टर खरीदने की 2 अरब डॉलर की डील को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने 24 यूएस-निर्मित MH-60 रोमियो मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर के अधिग्रहण को अपनी मंजूरी दी। अमेरिका से 24 एडवांस्ड MH 60 ‘रोमियो’ हेलिकॉप्टर की यह डील नौसेना के लिए अहम है क्योंकि उसके कुछ जहाज जल्द ही समुद्र में उतरने वाले हैं, लेकिन इनके लिए एक सक्षम हेलिकॉप्टर अभी मौजूद नहीं है। गौरतलब है की डोनाल्ड ट्रंप 24 और 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं।

भारत ने नौसेना को और अधिक मजबूत और ताकतवर बनाने और आतंकवाद पर लगाम लगाने के मकसद से यह डील की है। सूत्रों ने बताया कि इस कॉन्ट्रैक्ट पर ट्रंप के दौरे के दौरान हस्ताक्षर किए जाएंगे। अडवांस्ड हेलिकॉप्टर से युद्धपोत को दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में मदद मिलती है। ऐसे हेलिकॉप्टर न होने के कारण नौसेना के पास हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों का पता लगानेकी क्षमता कम है। नौसेना को 120 से अधिक नेवल मल्टी रोल हेलिकॉप्टर की जरूरत है।

रोमियो हेलिकॉप्टर की खासियत

बता दें कि रोमियो हेलिकॉप्टर भारतीय नेवी के लिए बेहद खास है। यह सतह और पनडुब्बी भेदी युद्धक अभियानों में भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ाने में कारगर है। यह हेलिकॉप्टर जंगी पोतों, जहाजों, पनडुब्बियों अथवा दुश्मन के अन्य ठिकानों पर अचूक निशाना साधने में सक्षम है। समुद्र में तलाशी और बचाव कार्यों में भी इस हेलिकॉप्टर की काफी उपयोगिता है।

हाल के वर्षों में अमेरिका से रक्षा सौदों में वृद्धि

भारत ने अमेरिका से 18 अरब डॉलर से अधिक के डिफेंस इक्विपमेंट खरीदे हैं और मिलिस्ट्री लॉजिस्टिक्स साझा करने के लिए कुछ एग्रीमेंट किए हैं। भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा मिलिट्री ट्रेनिंग पार्टनर भी है।

कुछ दशक पहले तक भारत डिफेंस इक्विपमेंट की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से खरीदता था। लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका से इन इक्विपमेंट की खरीदारी बढ़ी है। एशिया में चीन की बड़ी ताकत के मद्देनजर अमेरिका सामरिक संतुलन बरकरार रखने के लिए भारत की क्षमता बढ़ाना चाहता है। इसी वजह से उसने भारत को डिफेंस इक्विपमेंट की बिक्री बढ़ाई है और वह टेक्नोलॉजी के लिहाज से भी इस एरिया में मदद कर रहा है।

 


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