मोदी राज में रक्षा क्षेत्र में भारत बनेगा आत्मनिर्भर 

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छोटे कारोबारी, किसान ,मजदूरों और रेहड़ी पटरी वालों की सुध लेने के बाद मोदी सरकार ने नवभारत निर्माण के लिये आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत देश के उन सेक्टरों को तेजी देने के लिये आर्थिक सहायता की घोषणा की, जिससे देश न केवल अपने पैरों पर खड़ा होगा बल्कि विश्व को ये दिखा देगा कि भारत अब रुकने वाला नही।  चौथी किस्त का ऐलान करते हुए वित्तमंत्री ने कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, सामाजिक बुनियादी ढांचा, विमानन, बिजली वितरण, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की है। लेकिन कोयला और रक्षा सेक्टर को लेकर अहम फैसला लिया गया जिससे इस सेक्टर में हम आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

कोयला क्षेत्र से सरकारी एकाधिकार होगा खत्म

मोदी सरकार ने इस कोरोना काल में कोल सेक्टर को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। जिसके चलते अब कोल सेक्टर में अब सरकार का एकाधिकार खत्म कर दिया गया है और कमर्शियल माइनिंग की नई पंरपरा को शुरू किया गया है। गौरतलब है कि भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोल भंडार है। सरकार के इस फैसले के बाद देश में कोल खनन तेजी के साथ होगा जिससे तेजी के साथ इस सेक्टर को फायदा होगा। सरकार ने ऐलान किया है कि 50 नए ब्लॉक की नीलामी भी इस दौरान किया जायेगा। वही खनिज क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों को लाया जाएगा। 500 माइनिंग ब्लॉक उपलब्ध कराए जाएंगे। बॉक्साइट और कोयले की संयुक्त नीलामी होगी। स्टांप ड्यूटी को व्यावहारिक बनाया जाएगा।

हथियारों के मामले में भारत बनेगा आत्मनिर्भर

समूचे विश्व में हथियार का बाजार बहुत बड़ा बाजार है, इस बाजार में फिलहाल भारत अभी बहुत पीछे है। लेकिन इस सेक्टर में खुद की फौज को आत्मनिर्भर बनाना और देश में बने हथियारों को दूसरे देशों में निर्यात करने पर बल देने के लिये सरकार ने देश में रक्षा साजोसामान बनाने वाले ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा। वित्त मंत्री ने साफ किया कि यह निजीकरण नहीं है। इससे बोर्ड के कामकाज में सुधार आएगा। हम उम्मीद करते हैं कि यह आगे सूचीबद्ध होगी जिससे आम नागरिकों को उसके शेयर खरीदने का मौका मिलेगा। इस क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी गई है। डिफेंस उत्पादन में मेक इन इंडिया पर जोर दिया जाएगा। सेना को आधुनिक हथियारों की जरूरत है और उनका उत्पादन भारत में ही होगा। ऐसे उपकरणों और हथियारों की एक सूची अधिसूचित की जाएगी जिनके आयात पर पाबंदी होगी, उन्हें केवल देश में ही खरीदा जाएगा। यहां आपको ये बता दे कि भारत ने 2022 तक करीब 3500 करोड़ रूपये का निर्यात का लक्ष्य भी रखा है।

सामाजिक बुनियादी ढांचे में दिखेगा परिवर्तन

कोरोना संकट के वक्त देश में बोला जा रहा था कि अस्पतालों की भारी कमी पड़ेगी तो कैसे डॉक्टर नर्स लोगों तक सेवा मोहइया करवा पायेंगे लेकिन देश ने दिखा दिया कि जहां चाह होती है वहीं से राह निकलती है। इसीलिये इस संकट के वक्त सरकार ने युध्दस्तर पर अस्पताल बनवाये तो आगे ऐसे हालात न बने इसके लिये अभी से कमर कस ली गई है।अस्पताल और स्कूल जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचों में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग में बदलाव किया गया है। सरकार ने इसे 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है। इससे निजी निवेश आएगा। इसके लिए 8100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ताकी इस सेक्टर में तेजी से विकास हो सके।

इसके साथ साथ सरकार ने विमानन, बिजली वितरण, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के सेक्टर में भारत कैसे अत्मनिर्भर बने इसके लिये भी घोषणा की है। लेकिन जिस तरह से सरकार ने 20 लाख करोड़ रूपये का पैकेज जन जन के लिये प्रयोग किया है उसका दूरगामी परिणाम आने वाले दिनों में दिखेगा खासकर रक्षा सेक्टर में क्योंकि एक तरफ दुश्मन भारत से थर्राएगा तो दूसरी तरफ भारत के हथियारों का लोहा विश्व मानेगा।


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