दुनिया के सबसे खतरनाक मिसाइल रोधी हथियार S-400 से लैस होगा भारत, जानें इसकी खासियत

भारत को सभी एस-400 डिफेंस सिस्टम प्रणालियों की अपूर्ति 2025 तक कर दी जाएगी। यह जानकारी रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बबुश्किन ने शुक्रवार को दिल्ली में दी। इसके लिए रूस ने एस-400 मिसाइल प्रणाली का उत्पादन शुरू भी कर दिया है। रूस द्वारा निर्मित S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुनिया के सबसे आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में से एक है। एक साथ 36 मिसाइल को मार गिराने में सक्षम S-400, 600 किलोमीटर की दूरी तक बॉम्बर्स, जेट्स, स्पाई प्लेन्स, मिसाइल और ड्रोन्स के अटैक के पहचान करके उन्हें विफल कर सकेगा। इसके भारतीय सेना में शामिल होने से भारतीय सेना अपनी ओर आने वाले आकस्मिक हमलों से सफलतापूर्वक देश का बचाव कर सकेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस में 22-23 मार्च को होने वाली रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे। एस-300 का उन्नत संस्करण एस-400 है, जो सिर्फ पहले रूस के रक्षा बलों को ही उपलब्ध थी। यह मिसाइल 2007 से रूस के बेड़े में शामिल है। अब रूस भारत के लिए इसका निर्माण कर रहा है। इसका निर्माण अल्माज-एंते करता है।

बबुश्किन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन-रूस-ईरान के संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास में भारत को शामिल नहीं किए जाने पर कहा कि रूस देखेगा कि ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने इस युद्धाभ्यास को जमीनी स्थिति को समझने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। बबुश्किन ने कहा कि न्योता नहीं देने से भारत और रूस के संबंध खराब नहीं होंगे। जहां तक ईरान पर प्रतिबंध का सवाल है तो ऐसे प्रतिबंधों से भारत-रूस के संबंधों में दूरी नहीं आने वाली है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर डील हुई थी। इसके तहत रूस करीब 5 अरब डॉलर यानी 40 हज़ार करोड़ रुपए में S-400 डिफेंस सिस्टम की पांच रेजिमेंट्स भारत को बेचेगा। यह डिफेंस सिस्टम पहले भारत को 2020 में मिलना था, लेकिन अब यह सिस्टटम्‍ 2025 तक मिलेगा। भारतीय वायु सेना काफी मजबूत हो जाएगी। आइए जानते हैं कि S-400 एयर डिफेंस सिस्ट2म की खासियत के बारे में :

हवा में ही मार गिराएंगे दुश्मन की मिसाइल

हवा में ही मिसाइलों को मार गिराने वाली एस-400 वायु रक्षा प्रणाली दुनिया की आधुनिकतम प्रणाली है। एस-400 मिसाइल सिस्टम से भारत को रक्षा कवच मिल सकेगा। यह मिसाइल रोधी प्रणाली है। इसमें एक साथ मिसाइल लॉन्चर, शक्तिशाली रडार और कमांड सेंटर लगा होता है। इसमें तीन दिशाओं से मिसाइल दागने की क्षमता है। यह एस-300 का उन्नत संस्करण है। रूस इस उन्नत संस्करण एस-400 प्रयोग खुद के लिए ही कर रहा था। बाद में इस प्रणाली को चीन ने भी खरीदा। एस-400 का पहला उपयोग वर्ष 2007 में हुआ था।

खासियत:

 इस मिसाइल सिस्टम को जमीन से हवा में मार करने वाला दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार माना जाता है। यह सिस्टम एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और यहां तक कि परमाणु मिसाइल को 400 किलोमीटर पहले ही नष्ट कर सकता है।
 इसमें तीन प्रमुख चीजें लगी हुई हैं- मिसाइल लॉन्चर, शक्तिशाली रडार और कमांड सेंटर।
 इस सिस्टम को रूस की सरकारी कंपनी अल्माज-एंते ने बनाया है।
 एस-400 किसी भी तरह के आधुनिक फाइटर प्लेन से आसानी से निपट सकता है।
 एस-400 की तुलना अमेरिका की पैट्रिऑट एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल और एंटी-एयक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम से की जाती है।
 चीन-पाकिस्तान की परमाणु सक्षम बैलेस्टिक मिसाइलों के खिलाफ कवच।

अमेरिका कर चुका है विरोध

2017 में रूस के साथ हुए पांच अरब डॉलर के एस-400 मिसाइल सिस्टम के सौदे का अमेरिका विरोध कर चुका है। तुर्की ने भी रूस से एस-400 सौदा किया, लेकिन अमेरिका ने उस पर पाबंदी लगा दी। हालांकि, भारत के मामले में अमेरिका पर वहां के सांसदों का दबाव है कि भारत को इस प्रतिबंध से दूर रखा जाना चाहिए, इसलिए अमेरिका ने इस पर नरम रुख अपनाया है।