चीन, ब्रिटेन और कनाडा को पछाड़ यूनीकार्न के मामले में भारत बना अव्वल 

देश में तकनीक का समावेश और इस्तेमाल जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से यूनीकॉर्न स्टार्टअप की संख्या में भी इजाफा हो रहा। हुरुन इंडिया ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में दावा किया कि 2021 में भारत ने हर महीने तीन स्टार्टअप को यूनीकॉर्न बनाया है। अगस्त तक महज आठ महीने में ही यूनीकॉर्न की संख्या करीब दोगुनी बढ़कर 51 पहुंच गई है। भारत स्टार्टअप इकोसिस्टम में दुनिया का तीसरा सबसे बेहतर बाजार है। यहां 1 अरब डॉलर से ज्यादा बाजार पूंजीकरण वाले यूनीकॉर्न स्टार्टअप की संख्या लगातार बढ़ रही है।

2025 तक 150 से ज्यादा यूनीकॉर्न होंगे

भारत में तकनीक का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ रहा है। 2025 तक यहां यूनीकॉर्न की संख्या बढ़कर 150 से ऊपर चली जाएगी। भविष्य के यूनिकॉर्न का बाजार मूल्य अभी करीब 36 अरब डॉलर है। हम अभी से दुनिया में यूनीकॉर्न स्टार्टअप के मामले में दूसरे बड़े देश हैं। हमसे आगे इस मामले में सिर्फ अमेरिका ही है बाकी भारत ने यूनीकॉर्न के मामले में चीन ब्रिटेन और कनाडा को पीछे छोड़ दिया है। बड़े स्टार्टअप बनाने में बंगलूरू सबसे आगे है, जहां के 31 स्टार्टअप को जगह मिली है। दिल्ली-एनसीआर 18 स्टार्टअप के साथ दूसरे नंबर पर और मुंबई 13  के साथ तीसरे स्थान पर है। हालांकि, आईआईटी दिल्ली से निकले 17 तकनीकी प्रशिक्षुओं ने स्टार्टअप की नींव रखी। इस मामले में आईआईटी बॉम्बे ने 15, कानपुर ने 13 उद्यमी पैदा किए। आईआईएम अहमदाबाद से निकले 13 स्नातक प्रशिक्षुओं ने भी बड़े स्टार्टअप की नींव रखी। देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 2025 तक 90 करोड़ हो जाएगी, जो अभी 60 करोड़ है।

स्टार्टअप से लाखों लोगों को मिला रोजगार

Department For Promotion Of Industry And Internal Trade की एक रिपोर्ट के अनुसार, 14 जुलाई 2021 तक देश में 52 हजार 391 नए स्टार्टअप खुल चुके हैं, जिनसे 5 लाख 70 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। नए स्टार्टअप  में 53 यूनिकॉर्न बन चुके हैं, जिनका बाजार मूल्य 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये है। जो भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने में लगा हुआ है जो आने वाले भारत की 5 ट्रिलियन इकोनॉमी को पूरा करने में एक बड़ी मदद करेगी।

सच में भारत आज बदल चुका है तभी तो भारत के युवा आज रोजगार के लिये मारे मारे नहीं फिरते बल्कि रोजगार देने के लिये काम कर रहे है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने पर यही तो वादा किया था कि वो देश को ऐसे मजबूत बनायेगे जहां रोजगार मांगने वाले कम होगे और देने वाले ज्यादा इसकी शुरूआत भी आप देख रहे है जो ये बताता है कि भारत दुनिया में आर्थिक तौर पर मजबूत शक्ति के तौर पर उबर के दिखेगी।