अन्तरिक्ष के शिखर पर भारत – चीन से कई मामलों में आगे, पाकिस्तान दौड़ से बाहर

India On the peak of space

जिस गति से हमारी सरकार देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रही है, वो दिन दूर नहीं जब विकासशील देशों की गिनती में आने वाला हमारा देश भारत विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो जाये| ऐसी सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता| हालांकि वर्तमान में भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ भारत अग्रिम पंक्ति में विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गर्व से खड़ा है|

अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दक्षिण एशिया में भारत शीर्ष पर

अन्तरिक्ष विज्ञान एक ऐसा ही क्षेत्र हैं जहाँ भारत विश्व के सबसे विकसित देशों जैसे अमेरिका और रूस के साथ खड़ा है| अपने पाठकों को हम बताना चाहते है कि अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत ने कई ऊँचाइयों को हासिल किया है| इस क्षेत्र में भारत की गिनती अग्रणी देशों में की जाती है, और इन मामलों में भारत दक्षिण एशिया में प्रथम स्थान पर है| दक्षिण एशिया में कुल 8 देश है जिनमे भारत के अलावा दो ही ऐसे देश (पहला पाकिस्तान और दूसरा चीन) है, जो अंतरिक्ष मामलों में थोड़ा बहुत प्रयास कर रहे हैं| इस वक्त भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में दुनिया की सबसे भरोसेमंद एजेंसियों में से एक है|

कई मायनों में भारत चीन से भी आगे

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में चिर प्रतिद्वन्दी पडोसी देश चीन भी कई मायनों में भारत से पीछे है| यूँ तो अन्तरिक्ष विज्ञान या तकनीक के क्षेत्र में चीन की असली प्रतियोगिता अमेरिका और रूस जैसे देशों के साथ हैं|

परन्तु तथ्य ये है कि अति विकसित होते हुए भी चीन आज तक मंगल पर अपना यान नहीं भेज पाया है| 2011 में मंगल ग्रह के लिए चीन के रूस के साथ संयुक्त अभियान शुरू किया था परन्तु उसका यान पृथ्वी की कक्षा से भी बाहर नहीं जा पाया था| जबकि भारत के पहले ही अभियान मंगलयान ने सम्पूर्ण विश्व में कामयाबी के झंडे गाड़े|

चीन उन देशों में शामिल है, जिसके पास मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता है| उसके अपने दो अंतरिक्ष स्टेशन तियानगॉन्ग-1 और 2 कार्यरत हैं| चीन का सबसे भरोसेमंद रॉकेट ‘लॉन्ग मार्च’ है जिसने अपनी 100वीं उडान 2007 में पूरी की थी| इसी राकेट के ज़रिये चीन ने अपना मानव मिशन 2003 और चंद्र मिशन चांगई-1 2007 में लांच किया था| चीन के दो ऑर्बिटर पहला चांगई-1 और दूसरा चांगई-2 चन्द्रमा के चक्कर लगाते हैं|

चीन की इतनी उपलब्धियों के बावजूद पुरे विश्व में ISRO की धाक है क्योंकि भारतीय चंद्रयान-1 ने पहले ही मौके पर चांद पर पानी खोजकर सदी की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी दी|

अब तक पाकिस्तान के सिर्फ 5 सॅटॅलाइट ही पहुंचे अंतरिक्ष में

1961 से अब तक पाकिस्तान ने सिर्फ 5 सैटेलाइट्स ही लांच किये हैं| पहला सॅटॅलाइट बद्र-1 16 जुलाई 1990 को छोड़ा गया था, जिसने 6 महीने बाद ही काम करना बंद कर दिया| इसके बाद पाकिस्तान ने बद्र-बी, उपग्रह पाकात-1आर, आईक्यूब-1, और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नाम के और चार सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में छोड़े है| इनमे से कुछ सैटेलाइट्स चीन द्वारा निर्मित हैं और उसके प्रक्षेपण के लिए भी चीनी रॉकेट्स की मदद ली गयी थी|

1969 में इसरो की स्थापना के बाद भी भारत शिखर पर

ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी, उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च के नाम से जाना जाता था| आपको बता दें कि भारत से 8 साल पहले अंतरिक्ष के क्षेत्र में पाकिस्तान ने 16 सितंबर 1961 में स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (SUPARCO) की स्थापना की थी| पर फिर भी पाकिस्तान अंतरिक्ष मामलों में भारत से काफी पीछे है|

अंतरिक्ष की रेस में और भी कई देश शामिल हैं, पर ISRO लगातार अपनी कोशिशों और सफलता के कारण दुनिया में मशहूर है| अब तक में भारत अपने कई सैटेलाइट्स और मिशन अंतरिक्ष में लांच कर चूका है| अपने पाठकों को हमने पहले भी बताया है कि 12 और 13 जुलाई की मध्यरात्रि को भारत अपना चंद्रयान-2 लांच करने जा रहा है| यह मिशन अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भारत की कामयाबी को नयी ऊँचाई तक लेकर जायेगा| इस मिशन की सारी तैयारियां हो चुकी है बस इंतज़ार इसके लांच का है|