नोटबंदी के 5 साल बाद कैशलेस ट्रांजैक्शन में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा

मैंने सिर्फ देश से 50 दिन मांगे हैं.. 50 दिन.. 30 दिसंबर तक मुझे मौका दीजिए मेरे भाइयों बहनों अगर 30 दिसंबर के बाद कोई कमी रह जाए, कोई मेरी गलती निकल जाए, कोई मेरा गलत इरादा निकल जाए। आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर देश जो सजा करेगा वो सजा भुगतने को तैयार हूं।’ आपको ये पीएम मोदी के वाक्य याद है ना जो उन्होने नोट बंदी के 5 दिन बाद गोवा में बोला था? आज नोटबंदी के 5 साल पूरे हो गए हैं। साल 2016 में आज के दिन रात आठ बजे पीएम नरेन्द्र मोदी ने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया था। इसके बाद देशभर में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला, बैंकों के बाहर कतारें भी देखने को मिलीं। आइए जानते हैं देश को नोटबंदी से क्या मिला और क्या-क्या बदलाव हुए?

क्या काले धन पर लगा लगाम?
नोटबंदी का ऐलान डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के मकसद से किया गया था। साथ ही इस फैसले का सबसे बड़ा दावा ये था कि इससे जमाखोरों पर लगाम लगेगी और उन्हें पैसे को बैंकों में जमा करने के लिए मजबूर किया जाएगा। यही नहीं, नोटबंदी के फैसले से काला धन, चरमपंथ और आतंकवाद पर अंकुश लगने तक के वादे किए गए थे। नोटबंदी की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि कौन सा ईमानदार आदमी सरकारी अधिकारियों के बिस्तरों के नीचे रखे करोड़ों के नोटों की रिपोर्ट से या बोरियों में मिलने वाले नोटों की खबर से दुखी नहीं होगा? कुल मिलाकर विचार यही था कि इससे जिनके पास बेहिसाब नकदी थी, वो उसे या तो सर्वजनिक करें या फिर उसे नष्ट कर दें। कुछ लोगों ने इस कदम को भ्रष्टाचार के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के तौर पर भी देखा। एक तरह से देखा जाये तो इसका असर जरूर देखने को मिला। काले धन को लेकर कही ना कही सरकार लगाम जरूर लगी जिसका असर सरकारी खजाने में आज देखा जा रहा है।

नोटबंदी को लेकर सरकार शर्मिंदा थी इसलिए आरबीआई ने आंकड़े जारी करने में देरी  की'
क्या नोटबंदी के बाद से डिजिटल भुगतान में वृद्धि हुई है?
क्या भारत नोटबंदी के बाद एक कैशलेस अर्थव्यवस्था बन गया है यह एक अलग सवाल है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए सबसे अच्छा तरीका नोटों के चलन में बदलाव का आकलन हो सकता है। नोटबंदी से एक साल पहले 2015-16 में जीडीपी के 12.1 फीसदी हिस्से वाले नोट चलन में थे जो 2016-17 में कम होकर 8.7 फीसदी हो गए क्योंकि बैंकिंग प्रणाली नोटबंदी के बाद सिस्टम में कैश की वापस के लिए संघर्ष कर रही थी। लेकिन उसके बाद से यह आंकड़ा बढ़ता ही गया, यानी कैश की संख्या लगातार बढ़ी है। 2019-20 में यह 12% तक पहुंच गया। 2020-21 में यह आंकड़ा 14.5% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मूल्य के हिसाब से चार नवंबर, 2016 को 17.74 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे, जो 29 अक्टूबर, 2021 को बढ़कर 29.17 लाख करोड़ रुपये हो गए जो एक शुभ संकेत था।

 

नोटबंदी से क्या फायदा हुआ और कालाधन भारत आया इसपर तो बहुत बहस हो सकती है। लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि इस कदम से देश का आर्थिक ढांचा मजबूत हुआ तो दूसरी तरफ देश डिजिटल पेंमेंट की तरफ तेजी से दौड़ा। इसी लिये भारत आज दुनिया में सबसे आगे कैशलेस इकोनॉमी बन रहा है।