IMD World Business Rankings – भारत को मिला 43वां स्थान, सिंगापुर पहले स्थान पर

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इस बात में कोई संदेह नहीं की पिछले कुछ सालों में हमारे देश ने बहुत सारी उपलब्धियां हांसिल की है| विकसित देशों की दौड़ अब हमारा भारत भी तेजी से आगे बढ़ रहा है| 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद बहुत से देशों से भारत के अच्छे सम्बन्ध बने|

वैसे तो PM मोदी के जितने भी विदेश दौरे हुए उन सबको लेकर विरोधियों द्वारा उनकी आलोचना की गई| पर इन सब से परे हट कर मोदी ने अपना विदेश दौरा जारी रखा जिसके नतीजे अच्छे साबित हुए| बहुत से ऐसे देश भी थे जिनके साथ भारत ने व्यापारिक तौर पर डील साइन की और जिसका मुनाफा भी देखने को मिला|

बीते मंगलवार को हुए एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार IMD World Competitiveness Rankings, में भारत का स्थान 43वां हो गया है, वहीँ सिंगापुर ने अमेरिका को पीछे करते हुए, IMD World Competitiveness Rankings में प्रथम स्थान प्राप्त किया है| जबकि अमेरिका पहले स्थान से फिसल कर तीसरे स्थान पर आ गया है| आपको बताते चले की 2017 में भारत, IMD World Competitiveness Rankings में 45वें स्थान पर था|

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी देश के आर्थिक तौर पर मजबूत और विकसित होने के लिए उनके बीच आगे बढ़ने की होड़ होनी चाहिए| इससे न तो सिर्फ देश के व्यापर में वृद्धि आती है बल्कि रोजगार के नए रास्ते भी खुलते है और इन सब में भलाई मानवजाति की ही होती है|

आपको बता दें की IMD World Competitiveness Rankings की शुरुवात 1989 में हुई थी| ये रैंकिंग पुरे 235 सूचक के आधार पर की जाती है और दर्ज की गई 63 अर्थव्यवस्थाओ का मूल्यांकन कई पैमानों पर किया जाता है, जैसे कि किसी भी उद्यम का सतत विकास कैसा है, कोई उद्यम कितने रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाती है, और अपने नागरिकों के बारे में कितना सोचती है|

IMD Business School का कहना ये भी था कि वो किसी भी देश का पूरा लेखा जोखा लेती है| जैसे कि इस में कितनी बेरोजगारी है, कितना GDP है, और कितना उस देश की सरकार वहां की जनता के स्वास्थय और शिक्षा पर खर्च करती है| साथ-साथ वो उस देश के सामाजिक एकजुटता और भ्रष्टाचार की भी पूरी जानकारी लेता है| इस बार के उसके अध्ययन के अनुसार एशिया- पैसिफिक रीजन सबसे ज्यादा प्रगति दिखने वाला रहा क्योंकि यहाँ पर 14में से 11 अर्थव्यवस्थाओं ने अपने रैंकिंग को ऊपर बढ़ाने का काम किया है|

भारत ने भी अपने रैंकिंग को 45वें से 43वें पायदान पर पहुँचा दिया| भारत के इस सफलता के बहुत से कारण है जैसे GDP के रेट का बढ़ना, व्यापार में सुधार होना और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का व्यय बढ़ाना|

IMD के शोध के अनुसार अभी भी बहुत सी ऐसी अर्थव्यवस्था से जुडी चुनौतियाँ है जिस पर ध्यान देने की ज़रुरत है| IMD का कहना था कि भारत सरकार को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाना चाहिए, DIGITAL LITERACY को बढ़ावा देना चाहिए, और गाँव के इलाकों में पूरी तरीके से इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए|

2019 के सर्वे के अनुसार भारत ने बहुत से अर्थव्यवस्था से जुड़े पैमानों पर बढ़त दिखाई है पर कुछ ऐसे भी पैमाने थे जिनमे भारत पीछे रह गया जैसे पब्लिक फाइनेंस, शिक्षा का आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य और पर्यावरण|

और देशों की बात करें तो पहले पांच रैंक में, स्विट्ज़रलैंड, 5वें रैंक से 4थे रैंक पर आ गया है, जबकि UAE ने पहली बार अपना नाम पहले पांच रैंकिंग में दर्ज करवाया है|

मध्य पूर्वी देशों के प्रगति का सबसे बड़ा कारण था, तेल के दाम में वृद्धि होना| इस वजह से तेल पैदा करने वाले देशों के राजस्व में भी बढ़त हुई| ऐसे में जिस देश की रैंकिंग सबसे अच्छी हुई वो है सऊदी अरब जो 26वें स्थान से 13वे स्थान पर चला गया और क़तर ने भी 2013 से पहली बार पहले 10रैंक में अपना नाम दर्ज करवाया|

IMD के प्रोफेसर और डायरेक्टर Auturo Bris का कहना है- किसी भी व्यापर में निवेश की स्थिरता को बनाये रखने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है उसके संस्थानिक ढांचे को मजबूत किया जाये| साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाये की ये लोगो के ज़िन्दगी को और भी अच्छा बनाये|

साथ ही साथ इस सर्वे ने अमेरिका के दौड़ में पीछे आने का कारण डोनाल्ड ट्रम्प के टैक्स पॉलिसीस में किये गए बदलाव को ठहराया है| सोचने की बात ये है की अमेरिका की जनता ने अपना राष्ट्रपति एक ऐसे व्यक्ति को बनाया था जो अर्थशास्त्र की समझ रखता हो ताकि अमेरिका की आर्थिक स्थिती को मजबूत बनाया जा सके| पर यहाँ तो उलटे ही नतीजे निकलते हुए नज़र आ रहे हैं|

बात अगर अपने देश की करें’ तो ये देश के हित में एक अच्छी खबर है| देखते है मोदी अपने अगले कार्यकाल में भारत को और कितनी ऊँचाइयों पर लेकर जाते है|