अफगान मुद्दे पर भारत ने चीन और पाक को किया अलग थलग, दिल्ली डायलाग में देशों ने एकजुटता का लिया संकल्प

भारत के जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल को सही मायने में समझना नामुमकिन है क्योंकि वो ऐसी चाले चलते हैं कि दुश्मन पानी भी नहीं मांग सकता है। अब अफगान मुद्दे को ही ले लीजिये। भारत ने इस बाबत एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है जिसमें वो सफल भी होते दिख रहा है। जहां एक तरफ 7 देशों ने भारत के साथ चलने का ऐलान किया तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान मुद्दे पर अब चीन और पाक अलग थलग दिख रहे हैं। वही इस सम्मेलन में शामिल ना होकर उन्होने ये साफ दर्शा दिया कि वो अफगानिस्तान में अमन नहीं चाहते हैं। 

 

सुरक्षा मामलों के प्रमुखों की बैठक

अफगानिस्तान की स्थिति पर सात देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों यानी एनएसए या सुरक्षा मामलों के प्रमुखों की बैठक का आयोजन किया गया। भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने बैठक की अध्यक्षता की। भारत, रूस, ईरान के अलावा मध्य एशिया के पांच देशों ने एक साथ बुधवार को अफगानिस्तान के मौजूदा राजनीतिक हालात पर न सिर्फ गंभीर चिंता जताई बल्कि वहां से आतंकवाद, कट्टरता और मादक दवाओं के दूसरे देशों में प्रसार की बढ़ती आशंका पर लगाम लगाने की जरूरत व्यक्त की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया कि अफगानिस्तान वैश्विक आतंकवाद की सुरक्षित पनाहगाह न बनने पाए। आठों देशों ने काबुल में खुली और सही मायनों में समावेशी सरकार के गठन का भी आह्वान किया।

आतंकवाद के लिए नहीं हो अफगानिस्‍तान का इस्‍तेमाल

बैठक के बाद जारी घोषणा पत्र में सबसे अहम बात यह है कि इसमें भारत के इस मत को जगह दी गई है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह की आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए और आतंकियों को प्रश्रय देने या उन्हें प्रशिक्षण देने या उनके वित्त पोषण आदि का काम वहां नहीं होना चाहिए।

पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश

अहम बात यह है कि घोषणा पत्र में पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश देते हुए अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की जरूरत पर भी बल दिया गया है। साथ ही इसमें काबुल में ऐसी सरकार बनाने का आग्रह किया गया है जिसमें वहां के सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व मिले और जो जनभावना के अनुरूप हो। साथ ही वहां अल्पसंख्यकों, बच्चों और महिलाओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई।

 

कहीं ना कहीं इस बैठक के बाद ये साफ हो गया है कि चीन और पाक अब अफगान मुद्दे पर अलग थलग पड़ गये हैं खासकर डोभाल ने इस बैठक में जो रणनीति तैयार की है। उससे तो इन देशों पर दोधारी चोट पहुंचने वाली है। क्योंकि पहले रूस पाक और चीन के साथ खड़ा दिख रहा था लेकिन अब वो भी भारत के साथ आ चुका है।