रायसीना डॉयलॉग-2020 में भारत का जलवा

वैश्विक कूटनीति पर आयोजित होने वाले एशिया के बेहद अनूठे कार्यक्रम “रायसीना डॉयलॉग-2020” में भारत अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है| रायसीना डॉयलाग-2020 के तहत अगले दो दिनों में 80 सत्रों का आयोजन होना है जिसमें दुनिया भर से आये तकरीबन 700 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं|

ऐसी कार्यक्रमों का केंद्र बनना चाहता है भारत – विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डॉयलाग के शुरुआती सत्र को किये गए अपने संबोधन में कहा कि, “भारत अब सिर्फ दुनिया में होने वाले इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं बनना चाहता बल्कि वह इसके केंद्र के तौर पर स्थापित होना चाहता है। यही नहीं जिस तरह से बहुध्रुवीय विश्व बन रहा है उसमें अपने हितों की रक्षा करने के लिए भी इस तरह का आयोजन जरुरी है ताकि एक मंच पर सभी पक्षों की राय जाना जा सके।“

विदेश मंत्री जयशंकर के भाषण के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अफगानिस्तान के एनएसए हमदुल्लाह मोहिब, और दुनिया के आठ देशों के पूर्व प्रमुख और तकरीबन एक दर्जन देशों के मौजूदा विदेश मंत्री उपस्थित थे।

डेनमार्क के पूर्व पीएम व नाटो के पूर्व महासचिव ने की पीएम मोदी की प्रशंसा

डेनमार्क के पूर्व पीएम व नाटो के पूर्व महासचिव एंड्रेस रासमुसेन ने प्रधानमंत्री मोदी की भूरी भूरी प्रशंसा की| उन्होंने कहा कि, “अभी जिस तरह से कई देशों में तानाशाहों का कब्जा है उसे देखते हुए दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को एक होना चाहिए। भारत इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भी भारत के बढ़ते प्रभुत्व को स्वीकारा

आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारीसन जंगलों में आग लगने की घटना के कारण इसमें शिरकत नहीं कर पाए| उन्हें ही इस कार्यक्रम का उद्घाटन करना था| लेकिन अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि, “हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत एक अहम शक्ति है और आगे भी बना रहेगा। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि भारत अब इस क्षेत्र में ज्यादा क्रियाशील हो गया है।“