ड्रैगन की हर चाल को समंदर में डुबोने का  भारत ने तैयार किया खाका

जमीन हो या आसमान या फिर समंदर की गहराई, ड्रैगन को देना है मात, इस पर सरकार लगातार रणनीति बना रही है। मोदी सरकार इसके लिए हर तरह से सजग रहने के लिये बैठक पर बैठक भी कर रही है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना के टॉप  कमांडर्स की बैठक आज दिल्ली में हो रही है। इस बैठक में इस बात को लेकर रणनीति बनाई जा रही है कि चीन अगर समंदर में कोई हिमाकत करता है तो उसे कैसे करारा जवाब देना है।

 

हिंद महासागर में चीन के प्‍लान को फेल करने की तैयारी

जब से पूर्वी लद्दाख में तनाव चीन के साथ शुरू हुआ है तब से ही नेवी ने हिंद महासागर में सर्विलांस बढ़ाया है। सीमा पर जरा से हालात और खराब हुए तो नेवी पूरी ताकत के साथ दुश्‍मन को समुद्र में तहस-नहस के लिए पूरी तरह तैयार है। जंगी जहाज, सर्विलांस और एयरक्राफ्ट कैरियर्स पूरी तरह से मुस्‍तैद हैं। इस तैयारी से यही पता चता है कि भारत को चीन के मंसूबों का अंदाजा है। चीन ने जिस तरह से दक्षिण चीन सागर में अपने कब्‍जे को बढ़ाया है,  उसके बाद उसकी निगाहें इस ओर भी होंगे। ग्‍लोबल पावर बनने के लिए चीन को हिंद महासागर पर प्रभुत्‍व स्‍थापित करना ही होगा, मगर यहां उसका सामना भारतीय नौसेना से है जो इस इलाके में सुपरपावर है

चीनी दखल को कम से कम करने का बना प्‍लान

इस कॉन्‍फ्रेंस में नेवल कमांडर्स नई रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। चीनी नौसेना ने हिंद महासागर में अपने कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में नौसेना किस तरह से अपने ऑपरेशंस के जरिए चीनी नौसेना के मंसूबों पर पानी फेरे, इसपर कमांडर्स मीट में बात हो सकती है।नेवी ने अपने सबसे घातक जंगी जहाजों को हिंद महासागर में चीन की चुनौती के लिए तैनात किया है। दक्षिण चीन सागर में चीन का रुख देकर नौसेना पहले ही सतर्क हो गई थी। अगर चीन ने यहां अपनी दादागिरी दिखाने की कोशिश भी की तो उसे करारा जवाब मिलेगा। भारत के सर्विलांस जहाज दिन-रात हिंद महासागर में नजर रखते हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर्स भी तैनात हैं।

 

देशी पर है सरकार का जोर

बैठक में आत्मनिर्भर बनाने पर पूरा जोर दिया गया है। वैसे भी जब सरकार का पूरा जोर डिफेंस सेक्‍टर में देशी को बढ़ावा देने पर है। इस सेक्‍टर में आत्‍मनिर्भर होने का मतलब है कि चीन की हिम्‍मत नहीं होगी भारत की तरफ आंख उठाने की। भारत ने जिन 101 आइटम्‍स का इम्‍पोर्ट रोका है उसमें नेवी के हथियारों से लेकर परंपरागत पनडुब्बियां तक शामिल हैं। इसके अलावा क्रूज मिसाइलें भी अब भारत में बनेंगी। सरकार का जो प्‍लान है, उसके हिसाब से नेवी को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अच्‍छी-खासी ताकत मिलने वाली है। नेवी को देश में ही अगली पीढ़ी की छह पनडुब्बियां बनानी हैं जिसे तैयार करने की शुरूआत भी हो गई है।

मतलब साफ है कि ड्रैगन की हर चाल का तोड़ भारतीय सेना ने पहले से ही बना लिया है। बस भारत का जैसा इतिहास रहा है कि वो पहले किसी पर हमला नही करता लेकिन हमला करने वाले को छोड़ता भी नही इसलिये तैयारी पूरी कर ली गई है। जिससे 1962 का इतिहास न दोहराया जा सके।