भारत ने आर्थिक मोर्च पर चीन को एक और झटका दिया, कोलंबो में पोर्ट विकसित करने की तैयारी

अब वो दिन गुजर गये जब कोई भारत को आंख दिखाये और भारत शांत रहे बल्कि भारत अब उसी की जुबान में करारा जवाब देता है। भारत को घेरने के लिए चीन उसके पड़ोसी देशों का इस्तेमाल करता रहा है। पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में चीन पूंजी के निवेश से इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी-बड़ी योजनाएं तैयार कर रहा है। भारत के पड़ोसी देशों में चीन के इस निवेश की वजह से भारत के लिए रणनीतिक खतरा बढ़ रहा है। भारत ने अब चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी की है। भारत के पोर्ट कारोबारी अडानी समूह ने श्रीलंका में $70 करोड़ के निवेश से एक कंटेनर टर्मिनल के निर्माण करने का फैसला किया है जो चीन के लिए एक बड़ा झटका है।

समुद्र के जरिये घेरने की कोशिश

चीन लंबे समय से समुद्र के जरिए भारत को घेरने का प्रयास करता आया है। श्रीलंका में बंदरगाह विकसित करने के नाम पर, मालदीव को कर्ज के जाल में उलझाकर चीन अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने की कोशिश करता रहा है। चीन की इस चाल को भारत अच्छी तरह समझता है। इसी लिए बीजिंग को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत ने श्रीलंका की पोर्ट अथॉरिटी के साथ करार किया है। भारत के अडानी समूह ने कोलंबो बंदरगाह के वेस्टर्न कंटेनर टर्मिनल को विकसित करने एवं उसे 35 साल तक चलाने के लिए श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण  के साथ एक समझौता किया है।

कारोबार के लिहाज से अहम पोर्ट

अडानी समूह ने कोलंबो पोर्ट पर डब्ल्यूसीटी विकसित करने के लिए अपने स्थानीय साझेदार जॉन कील्स होल्डिंग्स और एसएलपीए के साथ एक निर्माण-परिचालन-अंतरण यानी बीओटी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दो स्थानीय संस्थाओं के पास वेस्ट कंटेनर इंटरनेशनल टर्मिनल नामक नई संयुक्त कंपनी की 34 और 15 फीसदी हिस्सेदारी होगी। यह पोर्ट कारोबार के लिहाज से अहम है क्योंकि यह देश की कुल बंदरगाह क्षमता का 24 फीसदी कारोबार करता है।इस के तैयार होने के बाद भारत को ऑस्ट्रेलिया जैसे बिजनेस करना और आसान हो जायेगा।

China's Xi: Handle disputes with 'dialogue and cooperation' | The  Independent

कर्ज के जाल में श्रीलंका

श्रीलंका ने पिछले दिनों देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए चीन से फिर 2.2 बिलियन डॉलर का नया कर्ज मांगा था। श्रीलंका पर चीन का पहले से ही अरबों डॉलर का कर्ज है। इसके एवज में उसे अपना हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को सौंपना पड़ा है। श्रीलंका को चीन की कर्ज के जाल में उलझते देख भारत समेत कई पश्चिमी देश परेशान हैं। दरअसल इन देशों को डर है कि कहीं चीन इस तरह के कर्ज के एवज में पूरे श्रीलंका पर कब्जा न कर ले। ऐसी स्थिति में हिंद महासागर में चीन को बड़ी ताकत मिल जाएगी। वैसे भी अब श्रीलंका भी ये बात अच्छी तरह से समझ चुका है कि चीन उसे कर्ज के जाल में फंसाने में लगा है इसीलिये अब श्रीलंका भारत से सीधे मदद भी मांग रहा है जो चीन के लिये एक बड़ा झटका हो सकता है।

चीन की हर चाल को भारत अब अच्छी तरह से समझ चुका है और उसे जवाब भी उसी के तरीके से दे रहा है। फिर वो आर्थिक मोर्चा हो या फिर सीमा पर सेना की तरफ से जवाब देना हो हर तरफ से चीन को भारत करारा जवाब दे रहा है।