भारत ने बदले FDI के नियम, भड़के चीन ने अब दिलाई ‘वुहान स्प्रिट’ की याद

 

कोरोना वायरस संकट के बीच अपनी कंपनियों को बचाने के लिए भारत सरकार ने एफडीआई के नियम क्‍या बदले, चीन भड़क उठा है। चीन के दूतावास ने पहले इस बदलाव को जहां WTO के नियमों के खिलाफ बताया था, वहीं अब चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स ने भारत सरकार को ‘वुहान स्प्रिट’ की याद दिलाई है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा क‍ि भारत सरकार अपनी ‘जीरो-सम गेम’ की मानसिकता को छोड़े ताकि दोनों देश ‘वुहान स्प्रिट’ को आगे बढ़ा सकें।

 

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने अपने लेख में कहा, ‘वुहान में औनपचारिक शिखर बैठक के बाद पिछले साल चेन्‍नै में पीएम मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात हुई थी। चीन पहला ऐसा देश है जो कोरोना महामारी से उबर चुका है और अपनी पूरी क्षमता से भारत और भारतीयों की मानवीय मदद कर रहा है। ऐसे में भारत को अपनी जीरो सम गेम की मानसिकता छोड़नी चाहिए और चीन के साथ सहयोग करना चाहिए। साथ ही अंतरराष्‍ट्रीय न्‍याय को बरकरार रखना चाहिए। चीन अभी भी आशा करता है कि इस महामारी के बाद दोनों देश ‘वुहान स्प्रिट’ के मुताबिक काम करते रहेंगे।’

 

उसने कहा, ‘भारत सरकार ने नियम बनाया है कि भारत से सीमाएं साक्षा करने वाले देशों से भारत में निवेश बिना सरकार की मंजूरी के नहीं होगा, चाहे वह किसी भी सेक्टर में हो। इस संशोधित नियम का मकसद कोरोना संकट का फायदा उठाकर भारतीय कंपनियों के टेकओवर और उसमें हिस्‍सा खरीदने के किसी भी प्रयास से बचाना है। चूंकि चीन एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमा भारत से मिलती है और चीन ने बड़े पैमाने पर भारत में निवेश कर रखा है और आने वाले समय में और ज्‍यादा निवेश कर सकता है। इसलिए इस संशोधित नीति का मकसद साफ है।’

 

क्या है नया नियम?

दरअसल, अभी तक कुछ मामलों जैसे डिफेंस, टेलिकॉम, मीडिया, फार्मास्युटिकल्स और इंश्योरेंस को छोड़ दें तो एफडीआई यानी विदेशी निवेश को सरकार की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती थी। अब सरकार ने नियम बनाया है कि भारत से सीमाएं साक्षा करने वाले देशों से भारत में निवेश बिना सरकार की मंजूरी के नहीं होगा, चाहे वह किसी भी सेक्टर में हो।

 

चीन की बौखलाहट बेवजह

भारत ने जो नियम बनाए हैं, उन पर चीन ने कहा है कि कुछ खास देशों पर प्रतिबंध लगाना वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के नियमों का उल्लंघन है। देखा जाए तो भारत के नए नियम सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार और भूटान पर भी तो लागू होते हैं, लेकिन दिक्कत सिर्फ चीन को हो रही है। चीन की ये छटपटाहट दिखा रही है कि भारत के लिए उसकी मंशा ठीक नहीं है।

 

चीन के इस कदम से बना नया नियम

चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने हाउसिंग लोन देने वाली भारत की दिग्गज कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड (HDFC) के 1.75 करोड़ शेयर खरीदे हैं। लॉकडाउन के बीच एचडीएफसी लिमिटेड के शेयरों में 32.29 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। जनवरी में इसका शेयर करीब 2500 रुपए का था, जो अब 1600 रुपए का हो गया है। इसी बीच मौके का फायदा उठाते हुए चीन ने एचडीएफसी लिमिटेड के बहुत सारे शेयर खरीद लिए हैं। BSE से मिली जानकारी के मुताबिक इन निवेश के बाद अब एचडीएफसी लिमिटेड में में चीनी केंद्रीय बैंक की हिस्सेदारी 1.01 फीसदी हो गई है। चीन के इसी कदम के बाद भारत सतर्क हुआ है।

 

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