ड्रैगन के सपने को भारत ने किया चूर चूर

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भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर करीब दो महीने से जारी तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर करीब २ किलोमीटर तक पीछे हट गई है। लेकिन भारत को अपनी ताकत की धौंस दिखाने वाले चीन की जो पूरे मामले में जग हंसाई हुई‚ या यूं कहें कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने चीन को जो जख्म दिए हैं‚ वो उसे सालों तक सालते रहेंगे।

चीन का चौधराहट का सपना टूटा

15 जून की रात दोनों देशों के बीच जिस तरह की खूनी झड़प हुई और सीमा पर जो तनाव पैदा हुआ‚ उससे ऐसा लगने लगा था कि किसी भी वक्त दोनों देशों के बीच सीमा पर लड़ाई छिड़ सकती है। दोनों ओर से सीमा पर सैनिकों का जमावड़ा शुरू हो गया। तोप और लड़ाकू विमानों तक की तैनाती शुरू हो गई। चीन एक ओर जहां सीमा पर अपनी तैयारी में जुटा था‚ तो दूसरी ओर चीनी सरकार का मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स भारत को आये दिन गीदड़ भभकियां देने में जुटा था। लेकिन भारत चुपचाप चीन को करारा जवाब देने की मुहिम में जुटा रहा। चीन को लग रहा था कि भारत उसकी गीदड़ भभकियों से डर जाएगा‚ लेकिन वो शायद भूल गया था कि यह 1962 वाला भारत नहीं है‚ 2020 का नया भारत है‚ जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं। 15 जून की रात भारतीय सेना के वीर जवान अपने शौर्य का परिचय दे चुके थे। अपने 20 सैनिकों के एवज में भारतीय सेना के जवान चीन के करीब 50 से ज्यादा जवानों की जीवन लीला समाप्त कर चुके थे। चीन को शायद इस बात का इल्म नहीं था कि उसकी हिमाकत का भारत इस तरह मुंहतोड़ जवाब देगा। इज्जत बचाने के लिए उसने सीमा पर अपना दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया। कभी युद्धाभ्यास का पुराना वीडियो जारी कर‚ तो कभी सीमा पर सैनिकों का जमावड़ा कर भारत को डराने की कोशिश करने लगा‚ 10 मई के बाद से चीन ने करीब 300 नई पॉजिशन तैनात कर लीं। लेकिन भारत पर उसकी तमाम तिकड़मों का कोई असर नहीं हुआ। उधर भारत ने जैसे ही चीन की तिकड़मों का जवाब देना शुरू किया‚ तो उसके होश फाख्ता होने लगे।

बिना गोली चलाये चीन को किया ढेर

असल में भारत ने चीन की दुखती रग पर हाथ रखना शुरू कर दिया‚ जिससे चीन की तिलमिलाहट बढ़नी शुरू हो गई। तमाम सेक्टरों में चीन की भागीदारी या यों कहें कि चीन की ठेकेदारी को खत्म करने की मुहिम शुरू हो गई। रेलवे‚ सड़क परिवहन और दूरसंचार विभाग ने चीन को झटका देना शुरू कर दिया। लेकिन चीन को करारा झटका तब लगा‚ जब भारत सरकार ने चीन के 59 एप्स को भारत में बैन कर दिया। भारत के इस कदम से चीन सही मायने में अंदर से हिल गया क्योंकि उसे इस कदम की तनिक भी उम्मीद नहीं थी। एक ओर जहां भारत चीन को आÌथक मोर्चे पर एक के बाद एक चोट दे रहा था‚ तो वहीं सामरिक मोर्चे पर भी वो डटकर मुकाबला करने को तैयार था। सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत तीनों सेनाओं के प्रमुख भी समय–समय पर जवानों का हौसला बढ़ाते रहे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी अचानक लद्दाख पहुंचे और वहां से उन्होंने न सिर्फ जवानों में जोश भरा‚ बल्कि चीन को भी दो टूक संदेश दे दिया। जवानों को संबोधित करते वक्त पीएम मोदी ने ने साफ कह दिया कि विस्तारवाद का युग खत्म हो चुका है और अब विकासवाद का दौर है। तेजी से बदल रहे समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। बीती सदी में विस्तारवाद ने ही मानव जाति का विनाश किया। अगर किसी पर विस्तारवाद की जिद हमेशा सवार हो तो वो विश्व शांति के लिए खतरा होता है। पीएम के इस बयान के महज कुछ घंटे बाद ही चीनी दूतावास की ओर से बयान सामने आया‚ जिसमें उसने कहा कि चीन की नीति विस्तारवादी नहीं। चीन के इस बयान से साफ हो गया कि पीएम का तीर सही निशाने पर जाकर लगा है। पीएम मोदी के संबोधन को चीन के लिए स्पष्ट संदेश माना गया कि भारत पीछे नहीं हटने वाला है और वो हर स्थिति से यकीनन सख्ती से निपटेगा।

मतलब साफ है कि चीन को जो जख्म बिना गोली चलाये भारत ने इस बार दिये है इसका असर लंबे वक्त तक चीन को रहेगा और वो भारत से पंगा लेने के लिए कई बार सोचेगा।


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