भारत ने चीन को धकेला पीछे, कारोबारी सुगमता वैश्विक रैंकिंग में निकला आगे

विश्वबैंक ने आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद कारोबारी सुगमता की संशोधित रैंकिंग जारी की है। इसमें भारत ने चीन को नीचे धकेल दिया है। दरअसल, चीन समेत कई देशों द्वारा गलत आंकड़े प्रस्तुत करने के बाद गस्त में विश्वबैंक ने कारोबारी सुगमता रैकिंग जारी करने पर रोक लगा दिया था। विश्वबैंक ने कहा कि आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद चार देश चीन, संयुक्त अरब अमीरात, साऊदी अरब और अजरबेजान की रैंकिंग में सुधार की जरूरत पड़ी।

चीन 85वें स्थान पर लुढ़ककर पहुंचा

विश्वबैंक द्वारा जारी संशोधित रिपोर्ट में चीन की रैंकिंग सात अंक गिरकर 85वें स्थान पर पहुंच गई है। अक्तूबर 2017 में जारी की गई 2018 की रिपोर्ट में चीन को 78वें स्थान पर रखा गया था। कारोबारी सुगमता रैंकिंग 2018 में कारोबार शुरू करने, ऋण प्राप्त करने और कर चुकाने के संकेतकों के आंकड़ों में अनियमितताओं को शामिल रहते चीन को 65.3 अंक दिया गया था। नियमित समीक्षा के बाद चीन को 64.5 अंक हासिल हुए हैं जिससे उसकी रैंकिंग लुढ़की है।

भारत की रैंकिंग में हुआ सुधार

कारोबारी सुगमता की संशोधित रैंकिंग में भी भारत 14 स्थान की छलांग लगाकर 63वें पायदान पर पहुंच गया है। भारत ने पिछले पांच साल (2014- 2019) में इस रिपोर्ट में 79 स्थानों की छलांग लगायी है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि पिछले 17 सालों से इज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट कई देश में कारोबार करने वाले कंपनियों के लिए बेहतरीन साधन बनकर सामने आया है।

संयुक्त अरब अमीरात

संशोधित रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने कर चुकाने के संकेतकों में गड़बरी किया था। अनियमितता के कारण सऊदी अरब का स्कोर 80.9 से घटकर 80.8 अंक हो गया है लेकिन वैश्विक रैंकिंग में वह इस बार भी 16वें स्थान पर बरकरार रहेगा। वहीं, अजरबेजान की रैंकिंग में सुधार हुआ है। अजरबेजान की वैश्विक रैंकिंग 34 है।

इन चार देशों पर था गड़बड़ी का शक

वर्ल्ड बैंक ने पिछले पांच साल की कारोबारी सुगमता रैंकिंग की समीक्षा करने का फैसला किया था। साथ ही वर्ल्ड बैंक ने इस साल अक्तूबर में आने वाली बिजनेस रैंकिंग लिस्ट पर फिलहाल रोक लगा दी थी। वर्ल्ड बैंक ने यह कदम चार देशों की तरफ से गड़बड़ी करने के शक में उठाया था। ये चार देश हैं चीन, संयुक्त अरब अमीरात अजरबेजान और सऊदी अरब हैं। विश्व बैंक ने कहा कि टीम के सदस्यों ने डूइंग बिजनेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2018 और 2020 के डेटा में हेरफेर करने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डाला गया था। विश्व बैंक के मुताबिक, डेटा परिवर्तन ‘अनियमित’ थे। ये उचित समीक्षा प्रक्रिया से बाहर किए गए थे और प्रकाशन की कार्यप्रणाली या टीम को प्रदान की गई किसी भी नई जानकारी से उचित नहीं थे।

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