प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से गंगा जल संरक्षण के लिए बढ़ रही जागरूकता

protection of Ganga water by the inspiration of Prime Minister Modi

जल संकट की विपदा से लोगो को बाहर लाने के लिए हमारी सरकार सत्ता में वापसी के साथ ही लोगो को जल सरंक्षण के निर्देश दे रही है| सरकार ने भी जल सरंक्षण के लिए कई अहम् कदम उठाये है| प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल से ही पर्यावरण और गंगा नदी के संरक्षण के लिए ख़ास उपाय किये हैं| गंगा नदी की सफाई के लिए उन्होंने ‘नमामि गंगे’ योजना की शुरुआत की|

बीते हफ्ते 6 जुलाई को भी PM मोदी ने वाराणसी में बड़ा लालपुर स्थित दीन दयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल के मंच से जनता को पर्यावरण की सुरक्षा और जल सरंक्षण के लिए निर्देश दिए| एक तरफ PM मोदी देश की जनता को पर्यावरण सुरक्षा और जल सरंक्षण के उपदेश दे रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ उनके अनुयायी उनसे प्रेरित होकर जनता को जागरूक करने का काम कर रहे है|

सूत्रों के अनुसार नमामि गंगे (गंगा विचार मंच) के सदस्य काशी के मणिकार्णिका घाट से दशाश्वमेध घाट तक लोगों को नाव के जरिए गंगा जल संरक्षण की महत्ता को और उसके तरीकों को समझा रहे है और साथ ही इसके लिए लोगो को जागरूक भी कर रहे है|

इसके लिए नमामि गंगे के सदस्य माइक और लाउडस्पीकर की मदद से लोगो को घाटों की स्वच्छता के निर्देश दे रहे हैं और साथ ही आग्रह कर रहे हैं कि प्रदूषित करने वाली वस्तुओं को नदी में प्रवाहित न करें| नमामि गंगे के संयोजक राजेश शुक्ल ने पूरी जानकारी देते हुए कहा कि, “गंगा जल सरंक्षण के लिए 5 राज्यों के सैकड़ों नगरों और उद्योगों को एक साथ आना होगा| चाहे वो वैज्ञानिक हों, सलाहकार, निति निर्माता, साधू-संत, या गंगा के किनारे आजीविका चलाने वाले मछली पालक; हम सभी के पूर्ण सहयोग से ही गंगा पूरी तरह से स्वच्छ हो सकती है|”

हमारे देश में गंगा सिर्फ नदी नहीं है| गंगा को भारत की जीवनधारा माना गया है| हिमालय के गंगोत्री से उत्पन होकर कई शहरों से गुजरती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली गंगा देश की सबसे प्राचीन और लम्बी नदी है| गंगा देश की जनता की आस्था से जुडी है और हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है|

हमारे माननीय प्रधानमंत्री इसे प्रदुषण मुक्त और पूरी तरह से स्वच्छ बनाना चाहते है जिसके लिए उन्हें देश की जनता का पूर्ण सहयोग चाहिए और इसलिए वो समय-समय पर जनता को पर्यावरण की स्वच्छता और गंगा जल सरंक्षण के संदेश देते रहे हैं, और अब तो उनके अनुयायी भी पूरी तरह से यही कोशिश कर रहे हैं कि उनके सन्देश को जनता के बीच अच्छी तरह से पहुँचाया जाये|