हर भारतीय के मन में, आत्मनिर्भर बनने की नमो ने जगा दी है आस

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कठिन दौर में कैसे देश में जोश भरा जाता है और कैसे नये अवसर बनाकर देश को विकास की तरफ ले जाया जाता है ये कोई सीखे तो पीएम मोदी जी से सीखे। क्योंकि कोरोना काल में जहां हर देश में मातम पसरा है तो भारत ही ऐसा देश है जो बदले अंदाज में इस महामारी से लड़ भी रहा है और तेजी से आत्मनिर्भर बनने के लिए निकल भी चुका है। इसके लिए मोदी जी ने एक बार फिर से कुछ मंत्र बताये हैं जिसके जरिये देश आत्मनिर्भर बनकर दिखायेगा।

मुसीबत की एक ही दवा है मज़बूती

पीएम मोदी ने एक बार फिर बताया कि मुसीबत के वक्त मजबूती ही देश की बड़ी ताकत साबित होगी। देश को कोरोना से मजबूती के साथ लड़ना तो होगा ही साथ ही एकता की मजबूती के साथ आगे चलना भी होगा। मुश्किल समय ने हर बार भारतीय के Determination को Strengthen किया है, एक Nation के रूप में देशवासियों के Resolve को ऊर्जा दी है, संकल्प को शक्ति दी है। जिसके चलते हम आने वाले दिनो में एक मजबूत आत्मनिर्भर देश के तौर पर देखे जाएंगे।

परिवार से शुरू होता आत्मनिर्भर भारत का पहला पाठ

खुद पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि आत्मनिर्भर बनने की शुरूआत तो हमारे संस्कार में है क्योंकि हर परिवार में जब बेटा बेटी बड़े होने लगते हैं तो उनसे कहा जाता है कि वो अपन पैर पर अब खड़े हो जिम्मेदारी अपनी संभाले। यानी की आत्मनिर्भर बने । ठीक इसी तरह देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हम सभी भारतीयों को खड़ा होना पड़ेगा और देश के घरेलू उघोगों को बढ़ाने के लिए काम करना पड़ेगा जिससे देश में बाहर से आने वाले सामान न केवल कम आये बल्कि भारत से बना सामान विदेशो में धूम मचाये।

छोटे उघोगों को देनी होगी प्राथमिकता

पीएम मोदी ने इस दौरान एक बार फिर हर राज्य में सबसे बेहतर क्या चीज तैयार होती है उसे आगे बढ़ाने पर जोर देने की बात कही उन्होंने छोटा सा उदाहरण देकर समझाया कि बंगाल में जूट का काम काफी होता है। प्लासिटिक के बंद होने के बाद जूट के बने बैग इस तरह तैयार किये जाएं कि वो सस्ते हो और हर राज्य तक आसानी से पहुंच सकें तो बंगाल इस कठिन दौर में भी मालामाल हो सकता है। ऐसे ही दूसरे राज्य भी उस चीज का उत्पादन ज्यादा करें जिसमे उन्हे महारत है तो फिर देखिये कैसे नही भारत आत्मनिर्भर बनता है। बल्कि नये आयाम भी स्थापित करता है।

वैसे पीएम मोदी देश को उसी तरह से जगा रहे हैं आत्मनिर्भर बनाने के लिये जैसे जामवन्त ने भगवान हनुमान को जगाया था समंदर पार करने के लिए और इसके आगे तो आप जानते हैं कि भारत की 130 करोड़ जनता के भीतर भी वही बल है जो भगवान हनुमान जी के अदंर था मतलब साफ है कि बस एक अलख जगाने की देरी है हम भारतीय दुनिया बदलने के लिए तो हर वक्त तैयार रहते हैं। ऐसे में अब वो वक्त दूर नही जब देश आत्मनिर्भर बनकर विश्व को एक नये भारत का दर्शन करवायेगा।


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