बीते हफ्तों में भारत ने पढ़ा ऐसा कूटनीति का पाठ, रूस से रिश्ते पर ताना मारने वाले अब कर रहे सलाम

तीन हफ्ते में ऐसा क्या हो गया! पिछले महीने पश्चिमी देश रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत की आलोचना कर रहे थे। यह अकेला दक्षिण एशियाई मुल्क है जिसने यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस की निंदा नहीं की। भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर रूसी तेल का आयात भी बंद नहीं किया। लेकिन उसके बावजूद अमेरिका हो या फिर ब्रिटेन या यूरोप के दूसरे देश सभी भारत के गुणगान और भारत के साथ खड़े दिख रहे है।

कूटनीतक हो तो मोदी जी जैसी

एक तऱफ अमेरिका के नेतृत्व में दुनियाभर के कई देश रूस पर वित्तीय प्रतिबंध लगाते आ रहे हैं और जो रूस के साथ खड़े है उसपर भी सख्त कदम उठा रहे हैं। कई देशों पर व्हाइट हाउस की नाराजगी भी सामने आई है लेकिन राष्ट्रपति जो बाइडन ने कह दिया कि यूक्रेन संकट पर भारत की स्थिति कुछ हद तक अलग है और भारत को लेकर उनके और पश्चिम देशों के सुर बदल गए है। अमेरिका समेत पश्चिमी देश रूस से रिश्ते पर ताना मार रहे थे लेकिन अब सलाम करते दिख रहे हैं। ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन दिल्ली आकर कह गए कि पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध के दौरान कई बार हस्तक्षेप किया और पुतिन के साथ बातचीत की। अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डेप्युटी एनएसए) दलीप सिंह ने साफ कह दिया कि भारत का रूस से ऊर्जा खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं है। यह भारत का निजी फैसला है कि उसे रूस से तेल खरीदना है या नहीं। न सिर्फ अमेरिका, यूके और दूसरे देश भी भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इतना ही नही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जंग के बीच पीएम मोदी से बात की और दोनो देशों के बीच अच्छे संबध होने का हवाला दिया वही ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने पीएम मोदी से हुई मुलाकात पर जोश भरी बात कही।

भारत का रुख अब भी वही

हालांकि यूक्रेन पर भारत का रुख अब भी वही है। भारत अब भी सस्ता रूसी तेल खरीद रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2021 में जितना तेल खरीदा था, उससे कहीं ज्यादा तेल 2022 के शुरुआती पहले महीने में खरीदा। वह किसी भी समस्या का शांतिपूर्ण ढंग से और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह रहा है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को सस्पेंड करने के लिए हुई वोटिंग से भारत अनुपस्थित रहा। जानकारों का कहना है कि भारत ने पश्चिमी देशों को अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी का मास्टरक्लास पढ़ाया है।

दरअसल, चीन के बढ़ते उभार को काउंटर करने के लिए अमेरिका की कोशिशों में भारत का बड़ा रोल है। अमेरिका वैश्विक शांति के लिहाज से चीन को रूस से भी बड़ा खतरा मानता है और चीन को अगर कोई ठीक टक्कर दे सकता है एशिया में वो भारत है और इस क्षमता को सभी जानते है इसलिये भारत के साथ दोस्ती के लिए सभी आगे आ रहे है।