कोरोना संकट काल में, हर दिन रेलवे छू रही नये आयाम

भारतीय रेल जिसकी स्पीड कभी थमती नही, कभी रुकती नही साल 1853 से जब से ये देश में दौड़ी है, तब से बस दौड़ती ही जा रही है और हर दिन नये आयामों को छू रही है। फिर मुसीबत कोई भी क्यों न हो अब कोरोना को ही ले लीजिये इस दौरान रेलवे ने जो भूमिका दिखाई है उससे तो यही लगता है कि सच में रेलवे देश की जनता की दुख सुख की साथी है। जिसके चलते पिछले 5 महीने में रेलवे ने कई रिकार्ड रच डाले हैं।

भारतीय रेल सुरक्षा में अब बेमिसाल 

कोरोना संकट काल में देश की रेल आज पटरी पर सरपट अगर दौड़ रही है तो इसके पीछे उसके हाईटेक होने का बड़ा अहम रोल है। खासकर मोदी सरकार में रेलवे के कायाकल्प को लेकर कई तरह के कदम उठाये गये है जिसके चलते रेलवे की स्पीड तो बढी है साथ में दुर्घटना भी कम हुई है। पिछले 5 महीने में देखें तो रेलवे में आमूलचूल बदलाव देखने को मिला है। जिसका असर आने वाले दिनो में आप साफ तौर पर देख सकते हैं। सबसे बड़ा बदलाव ये हुआ है कि रेलवे ने  5181 किमी की नई पटरियां बिछाई है तो इसी तरह 1274 मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग को हटाया गया है जिससे अब वहां होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगी है। वही 1309 आरओबी /आरयूबी का निर्माण भी इन्ही 5 महीनो में किया गया है। पुराने पुल रेलवे के लिये एक बड़ी समस्या बन गए थे जिनके चलते रेलवे को ट्रेन निकालने में खासी दिक्कत आ रही थी लेकिन इस बीच रेलवे ने 1367 पुलों की मरम्मत की गई तो 84 स्टेशनों की सुरक्षा में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग की गई । जिससे आज रेल अपने मुसाफिरों को सुरक्षा देने में नबंर वन बन रही है। तो देश में इन्ही कारणो से पहली बार इन 5 महीने में रेल की दुर्घटना से किसी की मौत नही हुई है। जिससे पता चलता है कि रेल आज अपनी किस तरह की पहचान बना रही है।

 

रेलवे स्टेशनो की सूरत भी बदली

ऐसा नही है कि रेलवे ने सिर्फ सुरक्षा के सेक्टर में ही काम किया हो, रेलवे ने मुसाफिरों को रेलवे स्टेशन में दिक्कत न हो इसके लिये छोटे से छोटे स्टेशन से बड़े से बड़े स्टेशनों को हाइटेक किया है। देश के ज्यादतर स्टेशनो में आज स्वचालित सीढ़ियां लगाई जा चुकी है। इसके साथ साथ लिफ्ट भी अब रेलवे प्लेटफार्म की शोभा बढ़ा रहे है। खासबात ये है कि ये बड़े स्टेशनो के साथ छोटे स्टेशनों में भी दिखे जा सकते हैं। इसके साथ साथ मुसाफिरों के बैठने की व्यवस्था हो या फिर सीनियर सिटीजन को रेलवे में दाखिल करने की वय्वस्था हो सब बिलकुल हाईटेक कर दी गई है। देश के कई स्टेशन तो बाहर से ऐसे लगने लगे हैं जैसे कई देशो के हवाई अड़्डे नही लगते हैं। और ये बदलाव बहुत कम बजट में मोदी सरकार ने करके दिखा दिया है। लेकिन रेलवे अभी भी ये मानकर चल रही है कि उसे काफी कुछ नया और करना है जिससे मुसाफिरों को वो और सुविधा दे सके। रेलवे कोच से लेकर रेलवे वेटिंग रूम तक ये बदलाव आप महसूस कर सकते हैं और शायद आप ने किया भी होगा।

यानी की रेलवे ने अब अपनी छवि बिलकुल बदल दी है और हो भी क्यों न आखिर नव भारत में जब सब बदल रहा है तो रेलवे क्यों पीछे रह जाती जो देश की जनता के लिए किसी परिवार के सदस्य से कम नही है। तभी तो रेलवे को भारत में एक विभाग नही बल्कि सुख दुख का अपना साथी मानते हैं।