21वीं सदी में है ‘कुड़ियों का है जमाना’

21वीं सदी में अब घर की चारदीवारी से निकल महिलाएं सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं। इस सदी में गांव हो या शहर महिलाओं के हौसले बुलंद हैं। उनका आत्मनिर्भर होना है ये बता रहा है कि ये सदी महिलाओं की सदी है।

ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की महिलाएं घर और बच्चों की देखभाल जैसे बिना भुगतान वाले जो काम करती हैं उसकी वैल्यू देश की जीडीपी के 3.1% के बराबर है। इस तरह के कामों में शहरी महिलाएं प्रतिदिन 312 मिनट और ग्रामीण महिलाएं 291 मिनट लगाती हैं। शहरी इलाकों के पुरुष सिर्फ 29 मिनट और ग्रामीण इलाकों के 32 मिनट घर और बच्चों की देखभाल जैसे काम करते हैं। महिलाए आज हर सेक्टर में आगे आ रही है।

देश-विदेशों में करती हैं बिजनेस

बिहार के आरा की रहने वाली अनीता गुप्ता के सफल महिला कारोबारी बनने की दिलचस्प कहानी है। मात्र 8 साल की उम्र में अनीता ने अपने घर में औरतों पर अत्याचार होते देखा था। उसी समय अनीता ने ठान लिया था कि वो अपनी जिंदगी में किसी पर निर्भर नहीं रहेंगी। इतना ही नहीं सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम करेंगी। साल 1993 में अनीता ने 2 लडकियों के साथ क्रोशिया ज्वेलरी पर काम शुरू किया था। वो कॉटन, सिल्क, खादी, रेशम के धागे से ज्वेलरी की डिजाइन खुद तैयार करती हैं। अनीता के प्रोडक्ट सिर्फ भारत में हीं नहीं विदेशों में भी बिकते हैं। अनीता ने 50 हजार महिलाओं को भी ज्वैलरी बनाने का हुनर सीखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है।

अंबाला स्टेशन का ट्रैफिक पर है इनकी कमान

घर चलाने से लेकर ट्रेन दौड़ानें तक, आज महिलाएं सभी काम कर रही हैं, ये कहानी अनीता चौधरी की है, अनीता ने हरियाणा के अंबाला स्टेशन पर ट्रेनों के ट्रैफिक कंट्रोल की जिम्मेदारी संभाल रखी हैं। उन पर यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा है। बता दें कि अंबाला स्टेशन से रोजाना 300 ट्रेनें निकलती हैं, जिसे कंट्रोल करना आसान काम नहीं है लेकिन अनीता अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रही हैं।

महिला वेट लिफ्टर जिसने उठाया 191 किलो वजन

पटियाला के हल्का नाभा में रहनेवाली 23 साल की हरजिंदर कौर ने वो कर दिखाया है, जिसपर पूरा देश नाज कर रहा है। हरजिंदर ने भुवनेशनर में खेलो इंडिया वेट लिफ्टिंग मुकाबले में 191 किलो का भार उठाकर देश में पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता। हरजिंदर ने जब वेट लिफ्टिंग शुरू की थी, तो पूरे गांव ने इस बात पर ऐतराज जताया था, अपनी बेटी के सपने पूरे करने के लिए हरजिंदर के परिवार ने कभी लोगों की परवाह नहीं की। हरजिंदर का सपना अब ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीतने का है।

रॉक बैंड ‘मेरी जिंदगी’ की इसलिए हुई शुरुआत

रॉक बैंड तो आपने काफी देखे होंगें लेकिन म्यूजिक, पैशन और मिशन का एक साथ तालमेल नहीं देखा होगा। हम बात कर रहे हैं, लखनऊ के पहले फीमेल मिशन रॉक बैंड ‘मेरी जिंदगी’ की, जिसे जया तिवारी ने बनाया है, ये बैंड गीतों के माध्यम से बेटी-बचाओ-बेटी-पढ़ाओ के लिए जागरुकता फैलाने के साथ ही अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को भी निभा रहा है। जया बताती हैं कि उन्होंने रॉक बैंड सिर्फ इसलिए बनाया ताकि देश की बेटियों में आत्मविश्वास जगाया जा सके।

इतना ही नही देश की महिलाएं लगातार आगे बढ़े इसके लिए मोदी सरकार लगातार एक के बाद एक योजनाएं बना रही है। शहर में महिलाओं के बढ़ते कदमों को सशक्त करने के लिए कौशल विकास योजना के तहत 87 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई, जिनमें 54 फीसदी को रोजगार मिला है। मुद्रा योजना के तहत 23 करोड़ तक का कर्ज दिया गया है, जिससे महिलाओं को शहरों में व्यापार करने में मदद मिलेगी। चाहे उद्योग जगत में सफलता हासिल करना हो या फिर बस और ट्रेन चलाना या फिर शारीरिक बल के क्षेत्र में, महिलाओं ने हर प्रकार की चुनौतियों को स्वीकार कर खुद को साबित किया है। हर गुजरते साल के साथ महिलाओं के कामयाबी की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है और ये युग महिलाओं के युग को बनाती जा रही है।