बंगाल चुनाव में मुस्लिम नहीं बल्कि कोई और है ‘गेमचेंजर’!

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक की बढ़-चढ़कर बात हो रही है। लेकिन एक वोट बैंक ऐसा भी है जिसका जिक्र बहुत कम हो रहा हो पर ये सत्ता पर काबिज करने का दम रखता है। हम बात कर रहे हैं एससी यानी अनुसूचित जाति की। मुस्लिमों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है, जिस पर चुनावी दलों की नजरें टिकी हैं।

दलित वोट बैंक बंगाल चुनाव में बनेगा गेमचेंजर

अनुसूचित जाति यानी दलित आबादी के मामले में बंगाल देश में तीसरे नंबर पर है। यहां 23.51 प्रतिशत दलित जनसंख्या है। राज्य में छोटे-बड़े कुल मिलाकर अनुसूचित जातियों के 60 समूह हैं। 9 जिलों में इनकी आबादी 25 फीसदी से ज्यादा है और 127 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में इनका रुख अहम रहेगा। इसके अलावा 6 जिले ऐसे हैं, जहां की 78 विधानसभा सीटों पर 15 से 25 फीसदी दलित आबादी है।2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 42 में से 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 68 में से 33 विधानसभा क्षेत्रों में उसे बढ़त मिली थी। इन 33 में से 26 विधानसभा मतुआ बहुल थीं। लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक टीएमसी को 34 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल हुई थी। इन आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि बीजेपी के पक्ष में दलित आबादी के बड़े हिस्से के वोट घूम गए। इन आंकड़ों की तुलना अगर 2016 विधानसभा चुनाव से करें तो उस वक्त टीएमसी 50 जबकि लेफ्ट 10 और कांग्रेस को 8 सीटों पर बढ़त मिली थी। हालांकि बीजेपी उस चुनाव में एक भी सीट पर बढ़त नहीं बना पाई थी। वहीं 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 37 सुरक्षित सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं लेफ्ट को 20 और कांग्रेस को 10 सीटों पर जीत मिली थी। उस वक्त बीजेपी का कहीं नामोनिशान नहीं था।

बंगाल में नामशूद्र आबादी होगी जिसके साथ उसकी जीत पक्की

बंगाल की दलित आबादी में नामशूद्र समुदाय की तादाद 17.4 प्रतिशत है। 18.4 फीसदी आबादी वाले राजबंशी समुदाय के बाद नामशूद्र समुदाय राज्य में दूसरे नंबर पर है। नामशूद्र समूह में मतुआ समुदाय का सबसे बड़ा हिस्सा है। 1.5 करोड़ आबादी के साथ 42 विधानसभा सीटों पर मतुआ समाज की मौजूदगी है। बीजेपी इस वोट बैंक को पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने जोशोरेश्वरी काली मंदिर में दर्शन किए थे। मतुआ समुदाय के बीच इस मंदिर की काफी मान्यता है। उसी दौरान बंगाल में पहले चरण की वोटिंग हो रही थी। मतुआ समाज के आध्यात्मिक गुरु हरिचंद ठाकुर की जन्मस्थली ओराकांडी में भी पीएम गए थे। जिससे ये लगता है कि मोदी जी की टीम इस वोट में सेधमारी की पूरी कोशिश करने में जुटी हुई है।

1 अप्रैल को वोटिंग के बाद बंगाल में चुनाव के 6 चरण और बचे होगे ऐसे में इन वोटरो को लुभाने में कोई पार्टी कोर-कसर नही छोड़ना चाहेगी। क्योकि सबको पता है कि ये जिनके साथ होगे उनके ही सिर चुनावी ताज सजेगा।