इमरान ने कश्मीर पर खोई उम्मीद, कहा- मोदी के रहते नामुमकिन

जम्मू-कश्मीर से Article 370 का खात्मा मोदी सरकार की पाकिस्तान को वो चोट है जिसका दर्द आज भी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को रह रहकर उठता रहता है। लेकिन अब इमरान खान इस दर्द से पस्त होकर अपनी हार स्वीकार कर ली है।

दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को जिस किसी भी देश का मंच मिलता है वो कश्मीर का रोना जरूर रोते हैं। एक टीवी इंटरव्यू में इमरान ने कहा की भविष्य में दूसरी मजबूत सरकार से अनुच्छेद 370 को हटाने की उम्मीद है। भाजपा सरकार के शासन में उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। दुनिया के सभी मंचों से निराश होकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर मुद्दे पर अब पूरी तरह से हार मानते हुए दिख रहे हैं।

हाल ही में इमरान ने बेल्जियम में भी कश्मीर का रोना रोया। वहां एक टीवी को दिए गए इंटरव्यू में वो यहां तक कह गए कि यदि कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया गया तो वो पाकिस्तान को चुनेंगे। कश्मीर के लोग पाकिस्तान को क्यों चुनेंगे के सवाल पर इमरान ने सिर्फ इतना कहा कि वहां मुस्लिम बहुतायत में रहते हैं।

बेल्जियम में दिए गए इस इंटरव्यू को पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी पर प्रसारण भी किया गया। इस वजह से पाकिस्तान के लोगों को ये दिखाने की कोशिश की गई कि इमरान अभी भी कश्मीर मामले को लेकर गंभीर हैं वो तमाम देशों से इसके लिए बात कर रहे हैं। लेकिन बड़ बोले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने यहां तक कहा कि जब तक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासन है तब तक ये मसला हल होने वाला नहीं है।

बता दे की भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया है, उसी के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। वो इस दुख को हर मंच पर जाहिर करते हैं। इमरान खान अपने स्तर से दुनियाभर में इसको हटाए जाने का विरोध दर्ज करवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों से इस मुद्दे को सुलझाने और इसका मध्यस्थ बनने के लिए कह चुके हैं, मगर किसी देश ने इसमें रूचि नहीं ली। अमेरिका ने दो टूक कह दिया कि ये दोनों देशों का आपसी मसला है वो आपस में बैठकर इसको सुलझाएं। वो इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

दुनिया जानती है कि भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और उसे लागू करने के लिए किसी तरह की ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है उसके बाद भी इमरान खान यही कहते हुए घूम रहे हैं कि भारत ने हथियार के बल पर कश्मीर से अनुच्छेद हटाया है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के इस तरह के दावों का भारत खंडन करता है और उसका कहना है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान और भारत के बीच शिमला समझौता होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के पहले के प्रस्तावों का कोई मतलब नहीं है और आपसी मसलों को दोनों देशों को बिना किसी बाहरी दखल के सुलझाना होगा।