सफलता की मिसाल IAS बालागुरु की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा

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IAS बालागुरु की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता| जिनके इरादे मजबूत होते हैं, कुछ अलग करने का जज्बा होता है, वही लोग अपने दृढ़संकल्प से अपने लक्ष्य को प्राप्त करते है|

IndiaFirst ने अपने पाठकों को ऐसे कई प्रेरणाश्रोत व्यक्तियों की कहानी बताई हैं| अभी बीते दिनों, नागपुर के प्यारे खान जी का परिचय हमने अपने पाठकों से करवाया था, जो कभी रेलवे स्टेशन पर संतरे बेचा करते थे और आज 400 करोड़ की कंपनी के मालिक है| ऐसी ही सफलता और प्रेरणा की एक अन्य कहानी हम आज लेकर आये हैं|

हम मूलरूप से तमिलनाडु के गांव थेरापडी के निवासी बालागुरु के IAS अधिकारी बनने की संघर्षपूर्ण दास्तान की बात करने जा रहे हैं| इनकी कहानी बेहद दिलचस्प, रोमांचकारी और प्रेरणादायी है| 31 वर्ष के बालागुरु मध्यप्रदेश के पन्ना जिला पंचायत के नये मुख्य कार्यपालिका अधिकारी (सीईओ) बनाये गए है| बीते 1 जुलाई को उन्होंने अपना पदभार ग्रहण किया| इसके साथ ही जिला पंचायत कायार्लय पन्ना की कार्य प्रणाली में बदलाव नजर आने लगा है|

क्या है बालागुरु के सफलता की कहानी ?

बालागुरु बताते है कि बचपन से ही उनका सपना कलेक्टर बनने का था पर उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुज़र रहा था| ऐसे में उनके लिए अपने सपने को पूरा करना भी एक सपने जैसा ही था| उनके पिताजी कुमारसामी पेशे से एक खेतिहर मजदूर थे और उनकी माँ मवेशी पलने का काम करती थी|

बालागुरु ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की और फिर एक अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी शुरू की जहाँ उन्हें महीने के 4000 रुपये मिलते थे| उनकी अस्पताल में नौकरी रात की शिफ्ट में रहती थी| नौकरी करने के साथ ही बालागुरु ने पत्राचार कोर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की और इस दौरान बहन अपनी बहन जानकी के विवाह में परिवार का सहयोग भी किया|

आपको बता दें कि वर्ष 2014 में बालागुरु ने यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की| अपने संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए बालागुरु बताते हैं कि अक्सर अखबार पढने के लिए वो नाइ की दुकान में जाया करते थे| उसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी के लिए वो चेन्नई पब्लिक लाइब्रेरी जाने लगे, जहाँ उनका परिचय और भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले लोगों से हुआ|

ऐसा नहीं था कि बालागुरु ने यूपीएससी की परीक्षा पहली बार में ही पास कर ली| उन्हें भी तीन बार असफलता मिली पर फिर भी वो हारे नहीं और चौथी बार उन्हें यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिली|

बालागुरु अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते हैं| उनकी इच्छा है कि शासकीय सेवा में आने के बाद भी अपने माता-पिता को अपने साथ रखे|

बालागुरु का ये जीवन तो वैसे सभी लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत है, पर ये उनके लिए भी एक उदहारण है जो ये सोचते है हैं की गरीब परिवार का व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता| लक्ष्य हासिल करने के लिये यदि किसी में जुनून और इच्छाशक्ति है, तो बड़ी से बड़ी चुनौतियां व बाधायें भी उसकी सफलता के मार्ग को नहीं रोक सकतीं|

 


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