IAF ने रूस के साथ किया R-27 एयर-टू-एयर मिसाइल का सौदा, सौदे की लागत 1500 करोड़

IAF r-27 air-to-air missile deal

भारतीय वायुसेना दिन-प्रतिदिन अपनी आक्रमण शक्ति को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न देशों से लड़ाकू विमान और मिसाइलस का सौदा कर रही है | अपने पाठकों को हमने पहले बताया था की भारतीय वायुसेना ने रूस के साथ S-400 मिसाइल खरीदने का सौदा किया था | अब सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना ने रूस के साथ एक और सौदा किया है | भारतीय वायुसेना ने अपने हवाई युद्ध की छमता को बढ़ाने के लिए रूस से R-27 एयर-टू-एयर मिसाइलों का सौदा किया है जिसकी लागत पुरे 1500 करोड़ है |

भारतीय वायुसेना के बेड़े में मौजूद Su-30MKI लड़ाकू विमान को इन मिसाइल्स से लैस करना चाहती है और इसलिए IAF ने रूस के साथ ये सौदा किया है | सूत्रों के मुताबिक इस सौदे के अंतर्गत एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गए है|

क्या है R-27 एयर-टू-एयर मिसाइल ?

R-27 माध्यम दुरी से लेकर लम्बी दुरी तक के मिसाइल के प्रणालियों में शामिल है | इसकी सबसे खास बात ये है की ये हवा से हवा में युद्ध करने वाला मिसाइल है | रूस ने इसे खास तौर से सुखोई और मिग-21 जैसे फाइटर जेट्स की आक्रामक शक्ति को और भी मजबूत करने के लिए विकसित किया है| और अब जब भारत ने भी रूस के साथ इन मिसाइल्स के सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए है तो बहुत जल्द ये मिसाइल भारतीय वायुसेना के मिग-21 और सुखोई फाइटर जेट्स के बेड़े में भी शामिल हो जायेगा |

बता दे की इन मिसाइलों का अधिग्रहण 10-1 परियोजनाओ के तहत किया जायेगा जिसके अंतर्गत तीनों सेनाओ (जल सेना, थल सेना, वायु सेना) की अनिवार्यता होगी की वे एक न्यूनतम अवधी के लिए इन महत्वपूर्ण हथियारों को और इनके पुर्जे को सुरक्षित रखे | इस परियोजना को युद्ध अपव्यय रिज़र्व के नाम से भी जाना जाता है |

भारतीय वायुसेना अब 7600 करोड़ के सौदों पर कर चुकी है हस्ताक्षर

बीते 50 दिनों में भारतीय वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय द्वारा दिया गया आपातकालीन आवश्यकताओं के तहत अपने बेड़े में अत्याधुनिक हथियार व उपकरण को शामिल करने के लिए विभिन्न देशों से अब तक 7600 करोड़ का सौदा कर चुकी है | इन सौदे में स्पाइस-2000, स्टर्म अटाका एटीजिएम,S-400 जैसे सौदे शामिल है |

पुलवामा हमले के कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान से सटे भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सरकार ने सेना के तीनों अंगों को सुरक्षा की आवश्यकता अनुसार उपकरण खरीदने की अनुमति दी थी जिसके अंतर्गत सेना के तीनो अंग 300 करोड़ रुपये तक प्रति मामले की लागत पर तीन महीने के भीतर अपनी पसंद का उपकरण खरीद सकते है |