हैदराबाद निवासी ने प्लास्टिक से बनाया सस्ता पेट्रोल

Satish-kumar_made_petrol_by_plastic | तस्वीर साभार: Google

पेट्रोलियम का उत्पादन सबसे ज्यादा अरब देशों में होता है और यही से लगभग सारे देशों को इंधन का निर्यात किया जाता है| हमारे देश भारत में भी अरब देशों से ही तेल खरीदा जाता है| पर पेट्रोल के बढ़ते उपयोग के कारण पेट्रोल की सप्लाई को भी बढ़ाना जरूरी है| सरकार ने पेट्रोल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया ताकि लोगों को बताया जा सके कि धरती के अंदर पेट्रोल सीमित मात्रा में पाया जाता है और इसे दुबारा बनने में कई हजार साल का समय लग जाता है| ऐसे में किसी न किसी वैकल्पिक व्यवस्था की अत्यधिक आवश्यकता है|

आज हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करेंगे जिन्होंने पेट्रोल की इस मंदी का कुछ हद तक निदान किया है| हैदराबाद के निवासी 45 वर्षीय प्रोफेसर सतीश कुमार का दावा है कि वो प्लास्टिक से पेट्रोल बना सकते है|

कौन है प्रोफेसर सतीश कुमार?

प्रोफेसर सतीश एक मैकेनिकल इंजिनियर है और काफी सालों से हैदराबाद में रहते हैं| उन्होंने हाइड्रोक्सी प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी भी बनाई है जो अति लघु, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत रजिस्टर्ड है| इसी कंपनी के तहत वो पेट्रोल बनाते है, जहां प्लास्टिक को रीसायकल करके डीजल, विमान ईंधन, और पेट्रोल बनाया जाता है|

सतीश ने बताया कि वो ऐसे प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं जो वापस अपनी वास्तविक अवस्था में नहीं आ सकता| उनका दावा है कि तकरीबन 500 किलो प्लास्टिक 400 लीटर पेट्रोल में बदला जा सकता है| वो बताते है कि ये एक सरल प्रक्रिया है और इसमें पानी का प्रयोग नहीं होता, साथ ही इसमें पानी वेस्ट के तौर पर भी नहीं निकलता है|

प्रतिदिन बनाते है 200 लीटर पेट्रोल

बातचीत में सतीश ने बताया कि यह प्रक्रिया बिलकुल सरल एवं प्रदुषण रहित है| सतीश बताते है कि ये काम वो 2016 से कर रहे है और अब तक तकरीबन 50 टन प्लास्टिक को पेट्रोल में बदल चुके हैं| वो प्रतिदिन 200 लिटर पेट्रोल का उत्पादन कर लेते है जिसमे करीब 200 किलो प्लास्टिक की जरूरत पड़ती है|

सस्ता है सतीश का प्लास्टिक वाला पेट्रोल

हालाँकि सतीश का ये प्लास्टिक वाला पेट्रोल वाहनों के लिए कितना उपयोगी है, इसकी जांच होनी बाकी है| पर फिर भी सतीश इस पेट्रोल को 30-40 रुपये प्रति लीटर की दर पर स्थानीय लोगो को बेचते हैं| इस पेट्रोल के उत्पादन में PVC ( पॉली विनाइल क्लोराइड) और PET (पॉली एथेलीन टैरिफथेलेट) के अतिरिक्त सभी प्रकार का प्लास्टिक प्रयोग में लाया जा सकता है|

क्या है प्लाटिक को पेट्रोल में बदलने की प्रक्रिया

सतीश बताते हैं कि यह प्रक्रिया बहुत सरल और पूरी तरह से प्लास्टिक के संघटकों के टूटने पर आधारित है और इस प्रक्रिया को PYROLYSIS के नाम से भी जानते है| प्लास्टिक एक प्रकार का पॉलीमर है और इससे कुछ भी बनाने के लिए इसके पॉलीमर को तोड़ना जरूरी होता है| प्रक्रिया जिसमें बहुलकों को अलग करके उन्हें पुनः अपने मूल अणु (molecule) में वापस लाया जाता है, उसे विबहुलकन (depolarization) कहा जाता है | इस प्रक्रिया के बाद बहुलक अपने तत्वों में टूट जाता है और प्लास्टिक को पिघला दिया जाता है | इसके बाद प्लास्टिक को अन्य पदार्थों के साथ मिला कर निर्वात में 350 से 400 डिग्री सेल्सियस तापमान तक गरम किया जाता है| हीटिंग के लिए इंडक्शन, माइक्रोवविंग और इंफ्रारेड का प्रयोग होता है इसके बाद ही पेट्रोल बनता है|

गौरतलब बात यह है कि ये प्रक्रिया पर्यावरण को किसी भी तरीके से नुक्सान नहीं पहुंचाता है और ये कम लागत वाली प्रक्रिया भी है|