कैसे नया कृषि कानून बदल रहा किसानों की जिंदगी, ये साबित किया एमपी की जानजातीय महिलाओं ने

साल भर होने को आये हैं दिल्ली की सीमा पर कृषि कानून के खिलाफ कुछ लोग प्रदर्शन करने में जुटे हुए है पर अगर देखा जाये तो साल भर में कोई भी किस्सा ऐसा नहीं आया कि नये कृषि कानून से किसानों को नुकसान पहुंचा हो। हां ये जरूर है कि इससे किसानों के फायदे के किस्से जरूर सामने आये है। इसी क्रम में  वहीं मालवा क्षेत्र का आदिवासी बाहुल्य जिला आलीराजपुर खेतों में सफलता की फसल काट रहा है। महज 700 की आबादी वाले गांव लक्ष्मण फलिया की आदिवासी महिलाओं ने नए कृषि कानूनों की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर दिखाया है। महिलाओं ने अपने सामूहिक प्रयास से आय को तीन गुना तक कर दिखाया है।

पहले नहीं मिलता था सही दाम

पहले सब्जियों, मक्का, ज्वार और कपास जैसी परंपरागत फसलों को स्थानीय बिचौलियों के माध्यम से बेचकर वे किसी तरह गुजर-बसर करती थीं लेकिन दस माह पूर्व उन्हें राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से समूह बनाकर खेती करने की जानकारी मिली। इसके बाद महिलाओं ने शासन की योजना का लाभ उठाते हुए न सिर्फ ऋण प्राप्त किया बल्कि समूह में ही खाद-बीज और कीटनाशक दवाओं की खरीदारी भी की। इससे उनकी लागत बची। अब ये महिलाएं सब्जियों और अन्य फसलों को बिचौलियों के माध्यम से न बेचते हुए सीधे बाजारों में बिक्री के लिए दे रही हैं। सब्जी और कपास की फसल से साल भर में तीस हजार रुपये तक कमाने वाली महिलाओं को अब 90 हजार रुपये तक का लाभ हो रहा है। बिचौलियों के पास पहुंचने वाला मुनाफा भी कृषकों को ही मिलता है। लाभ में बढ़ोतरी देख अब ये महिलाएं और उनके स्वजन गुजरात की बड़ी मंडियों में भी अपनी उपज पहुंचा रहे हैं।

दो से तीन गुना तक बढ़ी आय

लक्ष्मण फलिया में रानी काजल माता समूह की दस महिलाओं ने कृषक उत्पादक समूह के जरिये खेती के लिए करीब 1.50 लाख रुपये का लोन आजीविका मिशन की सहायता से लिया। समूह की अध्यक्ष गजरी सुवरसिंह कहती हैं, पहले उन्हें एक साल में करीब 30 हजार रुपये की आय हो रही थी। समूह के प्रयास से अब उनकी आय करीब तीन गुनी हो गई है। अन्य सदस्यों ने भी दो गुना से भी अधिक कमाई की है। समूह ने खुद तो अपनी उपज पैदा की है, बाजार में अन्य किसानों की उपज को भी अपनी आय से खरीदा। इससे स्थानीय किसानों का उपज परिवहन का खर्च और समय बच गया। बाद में इसे धार जिले की कुक्षी, गुजरात के बोड़ेली की बड़ी मंडियों में जाकर बेचा, जिससे अच्छा मुनाफा हुआ। समूह की माने तो  अब हम सब मिलकर खेती कर रहे हैं। कहीं भी जाकर अपनी उपज बेच सकते हैं, इससे मुनाफा बढ़ गया है। घर-परिवार में समृद्धि की खुशहाली छाई है। क्षेत्र के अन्य किसान भी अब इससे प्रेरणा ले रहे हैं।

जैसा वादा मोदी जी ने किया था कि वो सत्ता आये तो किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रयास करेंगे तो वो उन्होने किया जबकि कुछ लोग आज किसानों की जगह बिचौलियो के हमदर्द बने बैठे है।